OIIPCRA: ओडिशा सिंचाई प्रोजेक्ट को लेकर निर्देश, विकास आयुक्त ने कहा- जलवायु अनुकूल कृषि को दें महत्व
ओडिशा की एकीकृत सिंचाई परियोजना (Integrated Irrigation Project of Odisha) को महत्व पर जोर देते हुए विकास आयुक्त और अतिरिक्त मुख्य सचिव, जल संसाधन अनु गर्ग ने कहा कि जलवायु अनुकूल कृषि से उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि कृषि उत्पादन को बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य के 15 जिलों में लगभग 1,683 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजनाएं कार्यान्वित की जा रही हैं।
ओआईआईपीसीआरए यानी ओडिशा की एकीकृत सिंचाई परियोजना विश्व बैंक सहायता प्राप्त है। इस प्रोजेक्ट का लाभ प्रदेश के अधिकतर किसानों को मिले इसके लिए परियोजना को व्यापक स्तर पर लागू किए जाने की योजना है। विकास आयुक्त इस हफ्ते शुक्रवार को परियोजना की प्रगति की समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने प्रोजेक्ट की प्रभावी तरीके से निगरानी के लिए जलवायु-स्मार्ट गांवों के निर्माण के लिए नवाचार की आवश्यकता पर बल दिया।

समीक्षा बैठक में ओआईआईपीसीआरए की परियोजना निदेशक रश्मि रंजन नायक ने प्रमुख क्षेत्रों में अब तक हासिल की गई उपलब्धियों और परियोजना के कार्यान्वयन के दौरान आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कृषि उत्पादन को तेज करने पर जोर दिया। नायक ने कहा कि कृषि को बढ़ावा देने के लिए 15 जिलों में लगभग 1,683 करोड़ रुपये की परियोजनाएं कार्यान्वित की जा रही हैं। ये प्रोजेक्ट बाह्य सहायता प्राप्त हैं। परियोजनाओं का उद्देश्य किसानों की क्षमता और आय बढ़ाने के लिए 538 लघु सिंचाई परियोजनाओं के तहत लगभग 56,400 हेक्टेयर कमांड क्षेत्र और लघु सिंचाई परियोजनाओं के प्रभाव में लगभग 70,000 हेक्टेयर वर्षा आधारित क्षेत्र में जलवायु-स्मार्ट कृषि का प्रदर्शन करना है।
वहीं सरकारी सूत्रों के मुताबिक राज्य में हरित जलवायु कोष के धन का उपयोग सामुदायिक तालाबों में भूजल पुनर्भरण और कमजोर क्षेत्रों में जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सूक्ष्म सिंचाई के लिए सौर पंपों का उपयोग करना है। परियोजना के लाभार्थियों का अनुमान छोटी भूमि वाले लगभग 1.25 लाख परिवारों से है। प्रोजक्ट के तहत सामुदायिक टैंकों का नवीनीकरण, सिंचाई के लिए सौर पंपों की व्यवस्था भी की जानी है।












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