ओडिशा सरकार नें मवेशियों के इंटर स्टेट मूवमेंट पर लगाई रोक, ये है वजह
राज्य सरकार ने सीमावर्ती जिलों में मवेशियों के एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने पर रोक लगा दी है। क्योंकि ओडिशा में गांठदार त्वचा रोग (एलएसडी) का प्रसार खतरनाक अनुपात में हो गया है।

भुवनेश्वर, 12 दिसंबर : राज्य सरकार ने सीमावर्ती जिलों में मवेशियों के एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने पर रोक लगा दी है। क्योंकि ओडिशा में गांठदार त्वचा रोग (एलएसडी) का प्रसार खतरनाक अनुपात में हो गया है। राज्य में अब तक 10,000 से अधिक मवेशी इस बीमारी से प्रभावित पाए गए हैं। राज्य में जहां पशु बाजारों को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है, वहीं बीमारी को फैलने से रोकने के लिए पशु प्रदर्शनियों और मेलों पर भी रोक लगा दी गई है। पशु चिकित्सा अधिकारियों और पुलिस को मवेशियों के एक राज्य से दूसरे राज्य में आने जाने पर नजर रखने का निर्देश दिया गया है।
सभी मवेशियों के टीकाकरण के लिए बालासोर, मयूरभंज, बारगढ़, देवगढ़, गजपति, गंजाम, झारसुगुड़ा, कालाहांडी, क्योंझर, कोरापुट, मलकानगरी, नुआपाड़ा, रायगढ़ा और सुंदरगढ़ सहित सीमावर्ती जिलों में विशेष टीमों को तैनात किया गया है। एलएसडी, मवेशियों, भैंसों और बकरियों को प्रभावित करने वाला एक कैप्रिपॉक्स वायरस रोग है, जो पहली बार 2019 में फानी चक्रवात के बाद ओडिशा में पाया गया था, राज्य में फिर से प्रकट हो गया है। शुरुआत में 31 अक्टूबर को मयूरभंज के बेटनोती क्षेत्र में पता चला, यह बीमारी 20 से अधिक जिलों में फैल गई है। सबसे ज्यादा मामले गंजम में हैं, इसके बाद बरगढ़ और बालासोर हैं।
राज्य में प्रभावित 10,047 मवेशियों में से 4,837 अब तक ठीक हो चुके हैं। हालांकि मौतों का कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है, लेकिन सूत्रों ने कहा कि एलएसडी से संक्रमित होने के बाद एक दर्जन से अधिक मवेशियों की मौत हो गई है। कृषि और मत्स्य पालन और पशु संसाधन विकास मंत्री रणेंद्र प्रताप स्वैन ने कहा कि यह बीमारी पशुपालकों के लिए चिंता का विषय बन गई है। इस बीमारी को फैलने से रोकने के लिए सरकार द्वारा कई उपाय किए गए हैं। उन्होंने बताया कि 541 पशु चिकित्सालयों एवं औषधालयों, 3239 पशुधन सहायता केन्द्रों तथा 314 सचल पशु चिकित्सा इकाइयों के माध्यम से संक्रमित मवेशियों का इलाज किया जा रहा है।
'गोट पॉक्स वैक्सीन' के माध्यम से पशुओं का टीकाकरण किया जा रहा है। राज्य में अब तक 6.32 लाख मवेशियों का टीकाकरण किया जा चुका है। विभाग ने एडवाइजरी भी जारी की है कि इसकी सूचना तत्काल नजदीकी पशुधन निरीक्षक, पशु चिकित्सक या मुख्य जिला पशु चिकित्सा अधिकारी को दें और प्रत्येक प्रखंड में उपलब्ध मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों का लाभ उठाएं। किसी भी क्षेत्र में बीमारी का होना। जबकि बीमारी की रोकथाम के लिए किए गए उपायों की निगरानी और पशुपालकों को सलाह देने के लिए राज्य जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष खोले गए हैं। पशुपालकों से विशेषज्ञों की सलाह के लिए टोल फ्री नंबर 1962 और 155333 पर टेली पशु चिकित्सा सेवा की मदद लेने का आग्रह किया गया है।
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