बिहार के बाद अब ओडिशा की बीजद सरकार जल्द जारी करेगी ओबीसी पर सर्वेक्षण रिपोर्ट
बिहार के बाद अब ओडिशा सरकार राज्य के पिछड़े वर्गो पर आधारित सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी करने की तैयारी कर रही है। ओडिशा राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग (ओएससीबीसी) ने इस साल मई और जुलाई के बीच पिछड़े वर्गों पर सर्वेक्षण किया था, जिसकी रिपोर्ट आयोग ने राज्य सरकार को सौंप दी है।

टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार ओडिशा में 4.7 करोड़ आबादी में से 42 फीसदी 208 पिछड़े वर्गों की श्रेणी में आते हैं। आयोग से जुड़े एक अधिकारी के अनुसार ओडिशा की पटनायक सरकार जल्द ये जातिगत जनगणना सर्वेक्षण की रिपोर्ट रिलीज कर सकती है।
बीजेडी के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री देबी प्रसाद मिश्रा ने मंगलवार कहा कि सर्वे के बाद डोमेन विशेषज्ञ एकत्र किए गए डेटा का विश्लेषण कर रहे हैं। इसके साथ ही देबी प्रसाद मिश्रा ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की सटीक गणना और ओबीसी को लाभ पहुंचाने के पटनायक सरकार के इरादे के बारे में भी जानकारी दी।
भाजपा विधायक गौरी नायक ने कहा ओडिशा सरकार ने मेहतन से ये सर्वेक्षण नहीं किया था। इसके साथ ही सुझाव दिया कि अधिक गहन सर्वे घर-घर में जाकर करने से सटीक डेटा मिलेागा। उन्होंने बताया सर्वे का अभ्यास स्वैच्छिक भागीदारी पर निर्भर है, जहां पर व्यक्ति की पहचान के लिए दस्तावेजों के साथ सर्वेक्षण केंद्र जाना पड़ता है, जिससे लोग बाहर हो जाता है।
कांग्रेस नेता नरसिंह मिश्रा ने संदेश व्यक्त किया कि ना तो केंद्र ओर ना ही राज्य सरकार ओबीसी के विकास को प्रथामिकता देती है। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि बीजद ओबीसी विरोधी है, वरना सर्वेक्षण की रिपोर्ट तुरंत साक्षा करती।
वहीं बिहार में जातीय जनगणना के बाद कर्नाटक की सिद्धारमैय्या सरकार पर जनगणना रिपोर्ट जारी करने का दबाव बढ़ रहा है, क्योंकि कांग्रेस इसी तरह की की जानकारी जुटाने के लिए देशव्यापी कवायद किए जाने की मांग कर रही है। हालांकि कर्नाटक में लिंगायत, वीरशैव और वोक्कालिगा जनगणना का विरोध कर रहे हैं।












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