झामुमो ने बताई असली वजह... आखिर क्यों, हेमंत सोरेन को नहीं हटा पा रहे राज्यपाल..
रांची,17 अक्टूबर- चुनाव आयोग द्वारा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की विधायकी को लेकर प्रेषित पत्र पर लगातार सत्तापक्ष हमलावर है। शनिवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राजभवन पर सवाल खड़े किए थे। रविवार को भी यह क्रम जारी रहा।
रांची,17 अक्टूबर- चुनाव आयोग द्वारा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की विधायकी को लेकर प्रेषित पत्र पर लगातार सत्तापक्ष हमलावर है। शनिवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राजभवन पर सवाल खड़े किए थे। रविवार को भी यह क्रम जारी रहा। सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने राज्यपाल पर तंज कसते हुए कहा कि दरअसल उनके पास दो लिफाफे आए हैं। एक लिफाफा चुनाव आयोग का और दूसरा भाजपा का है। राज्यपाल प्राइवेट यूनिवर्सिटी के कार्यक्रम में शामिल होते हैं और राजनीतिक बातें करते हैं।

मोर्चा की केंद्रीय समिति के सदस्य सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि राज्यपाल का यह बोलना कि जब उनकी मर्जी होगी, तभी लिफाफा खोलेंगे, भाजपा की हताशा को दर्शाता है। राज्यपाल को समझ में नहीं आ रहा है कि दोनों में से कौन लिफाफा खोलना है। यह भी उनके लिए संशय की स्थिति है कि लिफाफे का कंटेंट भले अलग-अलग है, लेकिन एक बात दोनों में है कि असंवैधानिक तरीके अपनाकर झारखंड सरकार को रोका जाए। यह परिभाषित कैसे होगा, यह लिफाफे में नहीं लिखा है। राज्यपाल के संशय की यही वजह है।
हम डरने वाले नहीं भाजपा से
झामुमो नेता ने कहा कि हमलोग भाजपा और उनकी शाखाएं ईडी, सीबीआइ और आइटी से डरने वाले नहीं हैं। झामुमो संघर्ष से उपजी पार्टी है। भाजपा के खिलाफ वही राजनीतिक संगठन संघर्ष कर सकता है, जो उससे नहीं डरे। जो उससे डर जाता है, भाजपा उसे निगल जाती है। लोजपा का उदाहरण सामने है। जदयू के साथ भाजपा ऐसा नहीं कर पाई। जैसा शिव सेना के साथ हुआ, वैसे तृणमूल कांग्रेस के साथ नहीं हुआ। झामुमो से भी भाजपा बहुत डरती है, क्योंकि भाजपा की कोई विचारधारा और नैतिकता नहीं है। आज गांवों में भाजपा के विधायक और सांसदों को घुसने की हिम्मत नहीं है। संवैधानिक तौर पर परास्त भाजपा को झारखंड छोड़ देना चाहिए। भाजपा सत्ता से हटने बाद विलाप में जुटी है।
मिस्ड काल से सदस्य बनने वालों का सम्मेलन कर रहे
उन्होंने कहा कि भाजपा का काम झूठ बोलना, जोर से बोलना और बार-बार बोलना है। जब इसका सदस्य आतंकी गतिविधि में पकड़ा जाता है तो वे उसे अधिकृत नहीं बताते, मिस्ड काल से बना हुआ सदस्य बताते हैं। अभी मिस्ड काल का खेला झारखंड में भी कर रहे हैं। ऐसे ही सदस्यों का पंचायत सम्मेलन बुला रहे हैं।












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