झारखंड: सरकारी स्कूलों में शुरू हुई जर्मन भाषा की क्लासेस, बच्चे भी नजर आए काफी उत्साहित
झारखंड: सरकारी स्कूलों में शुरू हुई जर्मन भाषा की क्लासेस, बच्चे भी नजर आए काफी उत्साहित
रांची, 10 सितंबर: झारखंड के सरकारी स्कूल के बच्चे विदेशी भाषा में बात करते नजर आएंगे। जी हां, झारखंड सरकार ने राज्य के तीन सरकारी स्कूलों में जर्मन भाषा की क्लासेज शुरू की है। रांची के पांडरा हाई स्कूल, तेतरी हाई स्कूल और बरियातू स्थित जीएमएस हाई स्कूल में इसकी शुरुआत की गई है।

जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार ने कोलकाता स्थित मैक्स मूलर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के साथ एक कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है। जिसके तहत तीन महीने के लिए बच्चों को हफ्ता में एक दिन जर्मन भाषा बोलना सिखाया जाएगा। विदेशी भाषा सीखने की ललक बच्चों में भी साफ तौर पर देखने को मिल रही है। जर्मन क्लासेज को लेकर बच्चें काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं। इस दौरान स्कूल के प्रभारी ने बताया कि जर्मन भाषा में बात करते हुए ये कोई प्राइवेट स्कूल के बच्चे नहीं है, बल्कि ये राज्य के सरकारी स्कूल के बच्चें है।
रांची के बरियातू के जीएमएस स्कूल के बच्चे एक दूसरे का हाल चाल विदेशी भाषा यानी जर्मन भाषा में पूछते हैं। जर्मन क्लासेज को लेकर बच्चे काफी उत्साहित नजर आते हैं। जर्मन भाषा में एक दूसरे को अभिवादन करने के साथ साथ बच्चे वन टू थ्री भी जर्मन भाषा में बोलते हैं। वही बच्चों को जर्मन भाषा सिखाने वाली शिक्षिका ने बताया कि कोलकाता के मैक्स मूलर इंस्टीट्यूट से ये जुड़ा हुआ है। इस इंस्टीट्यूट और राज्य सरकार की पहल से रांची के तीन स्कूलों में इसकी शुरुआत की गई है।
बच्चों को जर्मन भाषा सिखाने वाली शिक्षिका का कहना है कि ग्लोबलाइजेशन की वजह से अब पूरी दुनिया एक दूसरे से कनेक्टेड है। दूसरे देशों के लोग हमारे देश आते हैं। कोई बेहतर इलाज के लिए आता है, तो कोई घूमने आते हैं। ऐसे में इन मुसाफिरों को ऐसे लोग चाहिए होते हैं जो उनकी भाषा समझ सके। ऐसे में सरकारी स्कूल के बच्चे यदि फर्राटेदार अंग्रेजी और विदेशी भाषा बोलने लगे तो उन्हें आगे चलकर रोजगार के अवसर मिलेंगे।
राज्य के शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो का कहना है कि लंबे समय से हमारी कोशिश थी की हमारे स्कूल के बच्चे अलग से विदेशी भाषा सीखें। हालांकि कोरोना माहामारी के कारण दो साल तक सारे शिक्षण संस्थान बंद थे। अब कोरोना की रफ्तार धीमी हुई तो वापस सारे संस्थान खुल गये हैं। हमारी सरकार बच्चों को विदेश भी भेज रही है। साथ ही विदेशी भाषा भी सीखा रही है। ये कोशिश है कि राज्य के सारे सरकारी स्कूल में विदेशी भाषा की पढ़ाई शुरू कराई जाए।












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