45 मिनट संथाली और 5 मिनट हिंदी में सीएम हेमंत सोरेन ने दिया भाषण, आदिवासियों को गिनाई अपनी सरकार की उपलब्धियां

Jharkhand News मुख्‍यमंत्री हेमंत सोरेन चाकुलिया में उपस्थित एक कार्यक्रम में उपस्थित हुए। इस दौरान उन्‍होंने उपस्थित जनता को संबोधित किया।

Jharkhand News: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने चाकुलिया के केरुकोचा में मंगलवार को आयोजित शहीदों के सम्मान सह परिसंपत्ति वितरण समारोह के दौरान करीब 50 मिनट तक भाषण दिया। इसमें करीब 45 मिनट तक संथाली में और 5 मिनट हिंदी में उन्‍होंने अपनी बात रखी।

इस दौरान उन्होंने मुख्य रूप से संथाल बहुल इस इलाके में लोगों को अपनी सरकार द्वारा किए जा रहे जनहित के कार्यों की जानकारी विस्तार पूर्वक दी।

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यह बताने की कोशिश की कि उनकी सरकार राज्य में बनी पहले की सरकारों से कैसे भिन्न है। आदिवासी एवं मूलवासियों के लिए उनकी सरकार क्या-क्या कर रही है।

हेमंत सोरेन ने न केवल अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाई, बल्कि विपक्षी दल भाजपा एवं केंद्र सरकार को आड़े हाथों भी लिया।

हालांकि, इस बार मुख्यमंत्री ने सरकार को अपदस्थ करने अथवा ईडी के समन के विषय में कुछ भी बोलने से परहेज किया।

खास बात यह रही कि साबुआ हांसदा की स्मृति में पिछले 35 वर्षों से आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम इस बार सरकारी कार्यक्रम बन गया।

हेमंत सोरेन पहले भी इस कार्यक्रम में आ चुके थे, लेकिन पहली बार बतौर सीएम इसमें भाग लेने आए। इसे लेकर भी स्थानीय विधायक समीर महंती एवं झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह था। बड़ी संख्या में लोग मुख्यमंत्री को देखने एवं सुनने पहुंचे थे।

वैसे भी जिस जगह पर कार्यक्रम आयोजित था उस केरुकोचा मैदान में मंगलवार को साप्ताहिक हाट के कारण अच्छी खासी भीड़ रहती है। इसका भरपूर लाभ उठाते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी बात लोगों के बीच रखी।

माना जा रहा है कि 2024 चुनावी वर्ष होने के कारण मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस कार्यक्रम के जरिए क्षेत्र के मतदाताओं को लुभाने की भरपूर कोशिश की।

शायद यही वजह थी कि जो कार्यक्रम पहले साबुआ हांसदा स्मारक कमेटी द्वारा सादगी पूर्ण तरीके से मनाया जाता था उसे इस बार सरकारी कार्यक्रम बनाकर पूरे तामझाम के साथ आयोजित किया गया।

साबुआ हांसदा स्मारक कमेटी के पदाधिकारी समीर दास ने बताया कि 2 दिन पहले तक कमेटी अपने स्तर से कार्यक्रम की तैयारी में जुटी हुई थी। लेकिन अचानक कार्यक्रम की बागडोर प्रशासन ने अपने हाथों में ले ली।

शायद इसीलिए कार्यक्रम को शहीदों का सम्मान समारोह नाम दे दिया गया। हालांकि, कुछ लोगों ने कार्यक्रम के बैनर में साबुआ हांसदा का नाम एवं तस्वीर नहीं होने पर आश्चर्य भी जताया।

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