पराली मैनेजमेंट की तैयारियों में जुटी मनोहर सरकार, मशीनों पर भारी छूट देने का फैसला
चंडीगढ़, 4 अगस्त। धान की रोपाई के साथ ही हरियाणा सरकार पराली मैनेजमेंट की तैयारियों में जुट गई है। ताकि इस साल पराली जलाने की नौबत न आए। इसके लिए सरकार ने पराली मैनेजमेंट मशीनरी पर भारी छूट देने का फैसला किया है। उम्मीद है कि छूट की वजह से किसान मशीनें खरीदेंगे और पराली जलाने की घटनाएं कम हो जाएंगी। छूट व्यक्तिगत और संस्थागत दोनों श्रेणियों के लिए मिलेगी। इसके लिए किसान अगले 20 दिन में आवेदन कर सकते हैं। सरकार को उम्मीद है कि ज्यादा मशीनें बिकने से पराली जलने की घटनाओं में कमी आएगी।

राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कृषि यंत्रों की छूट पर खरीद को लेकर आवेदन आमंत्रित किए जा रहे हैं। जिसमें किसानों को व्यक्तिगत श्रेणी में 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। यानी मशीन जितने की होगी उसका आधा पैसा सरकार देगी। जबकि किसानों की सहकारी समिति, एफपीओ, पंजीकृत किसान समिति तथा पंचायत द्वारा कस्टम हायरिंग सैंटर स्थापित करने पर 80 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। यानी उन्हें महज 20 फीसदी पैसा देकर मशीन मिलेगी।
हरियाणा सरकार ने फसल अवशेष प्रबंधन के लिए छूट पर मशीन खरीदने को लेकर ऑनलाइन आवेदन मांगे हैं। इसकी अंतिम तारीख 25 अगस्त 2022 तक निर्धारित की गई है। ऑनलाइन आवेदन विभाग की वेबसाइट (https://agriharyana।gov।in/) पर होगा। यानी अब इस काम के लिए 20 दिन का ही वक्त बचा है। जल्दी आवेदन करिए और छूट पाईए। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि उक्त योजना के तहत लाभार्थियों का चयन संबंधित जिले के जिला उपायुक्त की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय कार्यकारिणी समिति द्वारा किया जाएगा। चयन के बाद किसान लिस्ट में शामिल कृषि-यंत्र निर्माताओं से मोल-भाव कर अपनी पसंद के निर्माता से पराली मैनेजमेंट मशीन खरीद सकते हैं। कृषि यंत्र निर्माता भी स्कीम में मशीनों की आपूर्ति के लिए विभाग के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं।
हरियाण धान उत्पादक सूबा है। यहां पर सरकार पराली मैनेजमेंट करने में पिछले साल फेल साबित हुई थी। पराली जलने की घटनाओं के मामले में यह तीसरे नंबर पर है। केंद्र सरकार की एक रिपोर्ट के मुताबिक 15 सितंबर 2021 से 30 नवंबर 2021 तक हरियाणा में पराली जलाने की 6987 घटनाएं रिकॉर्ड की गई थीं। इसी अवधि में 2020 में यहां पर पराली जलाने की 4202 घटनाएं हुई थीं। ऐसे में समझा जा सकता है कि राज्य सरकार पिछले साल पराली जलने की घटनाओं को घटाने में नाकाम रही थी। ऐसे में इस बार अभी से तैयारी हो रही है। देखना ये है कि राज्य सरकार अपनी इस कोशिश में कितनी कामयाब होगी।












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