मनोहर लाल सरकार अनार का बाग लगाने पर दे रही 50 प्रतिशत सब्सिडी, किसानों को होगा लाभ

चंडीगढ़, 30 जून। बारिश का मौसम आने को हैं और इसे देखते हुए किसान खरीफ सीजन की खेती की तैयारी में जुट गए हैं। कई किसान परंपरागत खेती करते हैं जिससे उन्हें बहुत कम लाभ मिल पाता है। जबकि बागवानी फसलों में अधिक लाभ होता है। बागवानी फसलों के अंतर्गत सब्जी और फल की खेती आती है। वहीं परंपरागत फसलों में धान, मक्का, बाजरा आदि फसलों की खेती की जाती है। यदि किसान परंपरागत फसलों के साथ ही खेत के कुछ हिस्से में सब्जियों और फलों की खेती करे तो काफी अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। सरकार भी सब्जी और फलों की खेती को प्रोत्साहित कर रही है। इसके लिए सरकार की ओर से किसानों को सब्सिडी का लाभ भी प्रदान किया जाएगा। इसी क्रम में हरियाणा सरकार की ओर से अनार का बाग लगाने पर किसानों को 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाएगी। इससे किसानों को लाभ होगा।

Fifty percent subsidy on pomegranate farming in haryana

हरियाणा सरकार की ओर से फलों का बाग लगाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि किसान धान की खेती छोड़ दें। इसके लिए उन्हें 50 प्रतिशत तक सब्सिडी का लाभ दिया जाएगा। बता दें कि पानी की कमी और लगातार गिरते जल स्तर को देखते हुए हरियाणा सरकार की ओर से राज्य के किसानों को धान की खेती की जगह फलों का बाग लगाने पर सब्सिडी का लाभ प्रदान किया जा रहा हैं। ऐसे में किसान इस बारिश में अनार का बगीचा लगाकर अच्छी कमाई कर सकते हैं। बता दें कि बारिश का मौसम अनार की बुवाई के लिए उपयुक्त माना जाता है। इसलिए इस बारिश के सीजन में किसान यदि अनार का बाग लगाएं तो कभी अच्छा मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं। इसी के साथ किसान अन्य सब्जियों और फलों की खेती करके भी अच्छा लाभ कमा सकते हैं।

हरियाणा राज्य सरकार राज्य के किसानों को धान की फसल छोडऩे और अन्य फसलों एवं फलों के बाग लगाने पर अनुदान दे रही है। जिसके लिए राज्य सरकार ने किसानों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। हरियाणा सरकार राज्य में किसानों को अनार, बेर, चीकू, लीची, आंवला, आडू, नाशपाती, अमरूद, आम, नींबू वर्गीय फल, अलूचा, अंगूर, पपीता, ड्रैगन फ्रूट इत्यादि फलों के बाग लगाने पर किसानों को सब्सिडी उपलब्ध करा रही है। यह सब्सिडी किसानों को 3 वर्षों के लिए दी जाएगी।

राज्य सरकार की इस योजना में सामान्य दूरी वाले बागों के अंतर्गत बेर, चीकू, लीची, आंवला, आडू एवं नाशपाती आदि फलों को शामिल किया है। सामान्य दूरी के लिए पौधों तथा पंक्तियों कि दूरी 6 मी। 3 7 मी। एवं इससे अधिक रखा गया है। इस वर्ग के पौधों की संख्या 95 प्रति एकड़ किसानों को रखनी होगी। सरकार सामान्य दूरी वाले बागों के लिए लागत का 50 प्रतिशत सब्सिडी के रूप में किसानों को दिया जाएगा। इस वर्ग के बागों के लिए अधिकतम लागत 65 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर है जिस पर 32,500 रुपए की सब्सिडी सरकार की ओर से किसानों को दी जाएगी। यह सब्सिडी किसानों को तीन वर्षों में दी जाएगी। इसमें प्रथम वर्ष के लिए 19,500 रुपए, द्वितीय वर्ष के लिए 6,500 रुपए एवं तृतीय वर्ष के लिए 6,500 रुपए दिए जाएंगे।

सघन बागों के अंतर्गत उद्यानिकी विभाग ने आम, अमरुद, नींबू वर्गीय, अनार, आडू, अलूचा, नाशपती, अंगूर, पपीता एवं ड्रैगन फ्रूट आदि फलों को शामिल किया है। सघन बागों के लिए 6 मी। 3 6 मी। एवं इससे कम पौधों की दूरी किसानों को रखना होगा। इस श्रेणी के लिए प्रति एकड़ 111 पौधे एवं इससे अधिक लगाए जा सकते हैं। सरकार सघन बागों के लिए किसानों को लागत का 50 प्रतिशत अनुदान देगी। सघन बागवानी के लिए अधिकतम एक लाख रुपए तक की लागत तय की गई है। इसके लिए किसानों को 50,000 रुपए का अधिकतम अनुदान किसानों को दिया जाएगा। किसानों को अनुदान की राशि तीन वर्षों में दी जाएगी। इसमें प्रथम वर्ष में 30,000 रुपए, द्वितीय वर्ष में 10,000 रुपए और तृतीय वर्ष में 10,000 रुपए अनुदान के रूप में दिए जाएंगे।

टिशु कल्चर के अंतर्गत उद्यानिकी विभाग ने खजूर को रखा है। इसके पौधे से पौधे की दूरी 8 मी। 3 8 मी। रखी जाती है। इस श्रेणी में किसानों को पौधों की संख्या 63 प्रति एकड़ रखनी होगी। टिशु कल्चर के लिए किसानों को लागत का 70 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। टिशु कल्चर खजूर की बुवाई पर कुल दो लाख रुपए की लागत तय की गई है। इस पर सरकार किसानों को 1,40,000 रुपए की सब्सिडी दे रही है। यह सब्सिडी किसानों को तीन वर्षों में दी जाएगी। इसमें प्रथम वर्ष में 84,000 रुपए, द्वितीय वर्ष में 28,000 रुपए और तृतीय वर्ष में 28,000 रुपए की राशि अनुदान के रूप में प्रदान की जाएगी।

हरियाणा उद्यानिकी विभाग की ओर से इस वर्ग के लिए मुख्यत: अनार, ड्रैगन फ्रूट, अमरुद, अंगूर के पौधों को शामिल किया है। इस श्रेणी के लिए किसानों को फल को सुरक्षित रखने के लिए जाल भी दिया जाएगा। ट्रेलाइजिंग सिस्टम /पौधा जाल प्रणाली के लिए किसानों को लागत का 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी। ट्रेलाइजिंग सिस्टम /पौधा जाल प्रणाली के लिए लागत मूल्य 1,40,000 रुपए रखी गई है। इसमें से सरकार की ओर से किसानों को 70,000 रुपए का अनुदान दिया जाएगा। यह राशि किसानों को एक बार में ही पूरी दी जाएगी।

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