'2 साल पहले मेरी रिपोर्ट पर कार्रवाई हुई होती तो मूसेवाला जिंदा होता', पूर्व आईजी और AAP MLA का खुलासा
पंजाब के गैंगस्टरों पर पूर्व आईजी और AAP MLA कुंवर विजय प्रताप सिंह ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि दो साल पहले पंजाब सरकार को सौंपी उनकी रिपोर्ट पर कार्रवाई हुई होती तो पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला जिंदा होते।

पंजाब में नेताओं और गैंगस्टरों की उच्चस्तरीय जांच करने वाले पूर्व आईजी और मौजूदा आप विधायक कुंवर विजय प्रताप सिंह का कहना है कि दो साल पहले पंजाब सरकार को सौंपी उनकी रिपोर्ट पर कार्रवाई हुई होती तो पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला जिंदा होते। पंजाब में गैंगस्टर पनपे ही राजनेताओं की छत्रछाया में हैं। विजय प्रताप ने बताया कि इस संबंध में उन्होंने 18 फरवरी 2020 को प्रदेश सरकार को रिपोर्ट सौंप दी थी, लेकिन इस पर न तो किसी ने बात की न ही रिपोर्ट को अब तक सार्वजनिक किया गया। रिपोर्ट में 2009 में सड़क हादसे में जान गंवाने वाले तत्कालीन वित्त मंत्री कैप्टन कंवलजीत सिंह का भी जिक्र है। कहा गया है कि वह दुर्घटना नहीं एक योजनाबद्ध हत्या थी।
वर्ष 2021 तक संगठित अपराध नियंत्रण इकाई (ओसीसीयू) के आईजीपी रहे कुंवर विजय प्रताप सिंह ने रिपोर्ट में कहा है कि गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया अकाली दल के एक बड़े नेता का शागिर्द है। वह सिद्धू मूसेवाला की हत्या के साजिशकर्ताओं में से एक है। भगवानपुरिया को रोपड़ से अमृतसर जेल में एक योजना के तहत शिफ्ट किया गया था। उन्होंने संसदीय चुनाव से ठीक पहले (23 मार्च, 2019) भगवानपुरिया को अमृतसर जेल स्थानांतरित करने के तर्क पर सवाल उठाया।
रिपोर्ट में कहा है कि नेता ने राजनीतिक लाभ के लिए अपने बाहुबल का उपयोग करने के उद्देश्य से गैंगस्टर को स्थानांतरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यही नहीं 2014 में अकाली-दल भाजपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ने वाले एक प्रभावशाली नेता की मीटिंग भी गैंगस्टरों द्वारा रखवाई गई थी। आप विधायक ने कहा कि जेल में बैठे लोग बाहर राजनेताओं की मीटिंग करवा रहे थे। कुंवर ने पंजाब सरकार के आदेश पर 11 नवंबर 2019 को जांच शुरू की थी और 18 फरवरी, 2020 को रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी। इस रिपोर्ट को आईजी व कई जिलों के एसएसपी से जानकारी लेकर तैयार की गई थी, लेकिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने रिपोर्ट को दबा दिया।












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