प्रदूषण के खिलाफ दिल्ली सरकार की जंग, खेतों में पूसा के जैव-अपघटक घोल का छिड़काव शुरू
दिल्ली सरकार ने राजधानी में पराली जलाने से रोकने के लिए खतों में पूसा के जैव-अपघटक घोल का निशुल्क छिड़काव मंगलवार से शुरू कर दिया।
नई दिल्ली, 18 अक्टूबर: दिल्ली सरकार ने राजधानी में पराली जलाने से रोकने के लिए खतों में पूसा के जैव-अपघटक घोल का निशुल्क छिड़काव मंगलवार से शुरू कर दिया। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किया गया 'पूसा बायो डीकंपोजर' एक सूक्ष्मजैविक घोल है, जो धान की पराली को 15-20 दिनों में खाद में बदल सकता है। पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने बुराड़ी में एक खेत में जैव-अपघटक घोल का छिड़काव किया। उन्होंने कहा कि इस महीने की शुरुआत में बारिश के कारण घोल के छिड़काव में देरी हुई है।

इस साल राजधानी में 5,000 एकड़ रकबे में इस घोल का छिड़काव किया जाएगा, जिसमें बासमती और गैर-बासमती धान की खेती की गई है। पिछले साल दिल्ली में 844 किसानों की 4,300 एकड़ जमीन पर इसका छिड़काव किया गया था। 2020 में 1,935 एकड़ जमीन पर 310 किसानों ने इसका इस्तेमाल किया था। दिल्ली सरकार ने जैव-अपघटक घोल की प्रभावशीलता को लेकर जागरूकता फैलाने और इसके इस्तेमाल को इच्छुक किसानों का पंजीकरण करने के लिए 21 दलों का गठन किया है।
अधिकारियों के अनुसार, इस जैव-अपघटक घोल के छिड़काव पर मात्र 30 रुपये प्रति एकड़ का खर्च आता है। वर्ष 2021 में तीसरे पक्ष से ऑडिट कराया गया था जिसमें पाया गया था कि यह घोल 95 फीसदी तक प्रभावकारी है। इसके बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार से घोल को पड़ोसी राज्यों में निशुल्क वितरित करने का आग्रह किया था।
आईएआरआई के आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में पिछले साल 15 सितंबर से 30 नवंबर के बीच पराली जलाने के 71,304 मामले सामने आए थे, जबकि 2020 में इसी अवधि में 83,002 मामले सामने आए थे। दिल्ली के पीएम 2.5 प्रदूषण में पराली जलाने से उत्पन्न प्रदूषकों का योगदान पिछले साल सितंबर में सबसे अधिक 48 प्रतिशत दर्ज किया गया था।












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