सीएम केसीआर की महाराष्ट्र यात्रा से देश की राजनीति में हलचल, जोश में बीआरएस कार्यकर्ता
तेलंगाना के मुख्यमंत्री और भारत राष्ट्र समिति के अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव की महाराष्ट्र यात्रा के लिए उनके 600 वाहनों के काफिले की कई लोगों ने आलोचना की होगी, लेकिन यह यात्रा अब देश में पूरे राजनीतिक माहौल को प्रभावित कर रही है।
भारतीय जनता पार्टी से लेकर कांग्रेस और शिवसेना तक, केसीआर के लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक विरोधियों ने एक तरफ ये दिखाने की कोशिश की, कि उनपर इस यात्रा से कोई असर नहीं पड़ा है, वहीं दूसरी तरफ वो केसीआर पर हमला बोलते हुए भी नजर आए।

यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जिन्होंने अब तक तेलंगाना के बाहर केसीआर या बीआरएस के बारे में एक शब्द भी नहीं बोला है, वो भोपाल के एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन पर वंशवाद की राजनीति का आरोप लगाने लगे। कांग्रेस, जो पार्टी के भीतर गुटबाजी की आग को बुझाने के लिए संघर्ष करती हुई नजर आ रही है, उसने बीआरएस पर भाजपा के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया।
तेलंगाना कांग्रेस प्रभारी माणिक राव ठाकरे ने दिल्ली में कहा कि बीआरएस कई राज्यों में कांग्रेस पार्टी की संभावनाओं को नुकसान पहुंचाने के एकमात्र इरादे से काम कर रही है और मुख्यमंत्री पर लोगों से किए गए अपने वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना (शिंदे गुट) के अध्यक्ष एकनाथ शिंदे ने बीआरएस प्रमुख के अपने राज्य के दौरे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री को अपने राज्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
दिलचस्प बात यह है कि शिंदे ने सोलापुर में जिला प्रशासन को यह सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए कि पंढरपुर में किसी भी राजनीतिक दल या राजनेताओं के पोस्टर न लगें। साथ ही पुलिस ने पंढरपुर पहुंचने वाले बीआरएस के लाखों समर्थकों पर हेलीकॉप्टर से फूलों की पंखुड़ियां बरसाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया।
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब गुट) के सांसद संजय राउत ने बीआरएस को भाजपा की बी-टीम कहा और उस पर शिवसेना (यूबीटी), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और कांग्रेस वाले महा विकास अघाड़ी को कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।












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