CM Hemant Soren: नियोजन नीति पर फोन कर सीएम मांग रहे सलाह, सरकार सुप्रीम कोर्ट नहीं जाना चाहती

झारखंड हाईकोर्ट की ओर से नियोजन नीति को रद्द हुए दो महीने से अधिक हो चुके हैं। सरकार ने राज्य के बेरोजगारों से दो महीने के भीतर नयी नियोजन नीति लाने की बात कही थी,

Hemant Soren

झारखंड हाईकोर्ट की ओर से नियोजन नीति को रद्द हुए दो महीने से अधिक हो चुके हैं। सरकार ने राज्य के बेरोजगारों से दो महीने के भीतर नयी नियोजन नीति लाने की बात कही थी, पर वो भी नहीं बनी। अब सीएम उम्मीदवारों को फोन कर सलाह ले रहे हैं कि नियुक्ति प्रक्रिया पर क्या किया जाए।
जी हां, चौंकिए मत। सीएम हेमंत सोरेन की आवाज में ऐसे कई उम्मीदवारों को कॉल आ चुके हैं कि नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने के लिए क्या किया जाए? वे उम्मीदवारों को विकल्प भी दे रहे हैं। इस तरह के कॉल आने के बाद से राज्य के बेरोजगारों के बीच उम्मीद जगी है। राज्य के युवाओं के बीच सीएम का कॉल आना चर्चा का विषय बना हुआ है।

समझिए पूरी बात

राज्य सरकार नियोजन नीति को लेकर गंभीर है। वह इसे जल्द से जल्द लागू करना चाहती है। साथ ही सरकार यह भी चाह रही है कि इस बार कि नियोजन नीति विवादों में न आए। इसलिए उम्मीदवारों से सीधे कॉल कर सलाह ली जा रही है कि क्या किया जाए? दरअसल सीएम की आवाज में एक रिकॉर्डेड कॉल आता है। यह कॉल आने से पहले उम्मीदवारों को एक मैसेज भेजा जाता है। यह मैसेज BB-600025 से आता है। जिसमें लिखा होता है : जोहार। माननीय मुख्यमंत्री जी आपसे नियोजन नीति एवं नियुक्ति प्रक्रिया पर आपकी राय जानना चाहते हैं।
इस विषय पर कुछ ही समय के बाद आपको कॉल किया जाएगा।

कॉल में पूछी जाती है यह बात

मैसेज आने के बाद कॉल आता है : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की आवाज में बताया जाता है कि सरकार नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करना चाहती है पर नियोजन नीति के लिए सुप्रीम कोर्ट नहीं जाना चाहती है। हमें क्या करना चाहिए 1932 खतियान आधारित स्थानीय नीति को नौवीं अनुसूची में शामिल होने का इंतजार करें या 2016 की नियोजन नीति के आधार पर नियुक्ति की जाए।

हाईकोर्ट ने रद्द की है नियोजन नीति

चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन व जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने 16 दिसंबर 2023 को झारखंड सरकार की नियोजन नीति को रद्द कर दिया था। इससे पहले खंडपीठ ने सात सितंबर 2022 को मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा था कि 'झारखंड कर्मचारी चयन आयोग स्नातक स्तरीय परीक्षा संचालन संशोधन नियमावली-2021' असंवैधानिक है। यह नियमावली भारतीय संविधान के अनुच्छेद-14 व 16 के प्रावधानों का उल्लंघन है। सरकार की यह नियमावली संवैधानिक प्रावधानों पर खरी नहीं उतरती है, इसलिए इसे निरस्त किया जाता है। साथ ही इस नियमावली से की गयी सभी नियुक्तियों व चल रही नियुक्ति प्रक्रिया को भी रद्द किया जाता है।

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