चंद्रबाबू नायडू की गिरफ्तारी के बाद उनकी अनुपस्थिति ने टीडीपी कार्यकताओं को किया मायूस
एपी राज्य कौशल विकास निगम (एपीएसएसडीसी) मामले में टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू जेल की सलाखों के पीछे बंद है। नायडू के इस केस में अरेस्ट होने के पहले टीडीपी नेता लोकसभा और विधानसभा चुनाव की तैयारी जोर-शोर से कर रहे थे और रणनीति बना रहे थे लेकिन नायडू की गिरफ्तारी के बाद कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरता जा रहा है। टीडीपी कार्याकर्ता 9 सितंबर को नायडू की गिरफ्तारी के बाद उनकी रिहाई की मांग को लेकर धरना- प्रदर्शन तक सीमित हो चुकी हैं।

वहीं दूसरी ओर नायडू के बेटे और टीडीपी महासचिव नारा लोकेश जो युवा गलम पदयात्रा शुरू करने वाले थे उसे वो नायडू की गिरफ्तारी के कारण बार-बार स्थगित कर रहे हैं। इसकी वजह है कि नायडू को जेल से छुड़ाने के लिए वो लगातार दिल्ली में रहकर वरष्ठि वकीलों और दिग्गज नेताओं ने मुलाकात करने में व्यस्त हैं।
इसके अलावा टीडीपी चुनाव रणनीतियों को तैयार करने के लिए पार्टी मुख्यालय में खुद को उपलब्ध रखा जा सके, उन्हें अपने वॉकथॉन को स्थगित करना पड़ रहा है।
अब जबकि चुनाव होने में लगभग महीने का समय बाकी हैं, ऐसा माना जा रहा है कि पार्टी मामलों के शीर्ष पर नायडू की अनुपस्थिति ने कार्यकर्ताओं को हतोत्साहित कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार अगर पार्टी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू को गिरफ्तार नहीं किया गया होता तो अब तक सभी क्षेत्रों के लिए उम्मीदवारों को अंतिम रूप देने का काम पूरा हो गया होता।नायडू की गिरफ्तारी के एक दिन बाद अभिनेता पवन कल्याण की जन सेना पार्टी (जेएसपी) टीडीपी के साथ चुनावी गठबंधन का ऐलान किया। जेएसपी की इस घोषणा ने टीडीपी नेताओं और कार्यकर्ताओं को राहत दी।
बता दें टीडीपी का आरोप है कि राजामहेंद्रवरम सेंट्रल जेल में बंद नायडू के केस में सरकारी फाइलिंग में जानबूझ कर देरी की जा रही है। वहीं नायडू के खिलाफ कई मामलों ने पार्टी कार्यकर्ताओं को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि अगर नायडू को कुछ और दिनों के लिए जेल में रखा गया तो आने वाले चुनावों में पार्टी का भविष्य क्या होगा।












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