ओडिशा मे छात्रों के छात्रवृति वितरण में हुआ है घोटाला, CAG ने अपनी रिपोर्ट ने किया खुलासा
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने ओडिशा में छात्रों को छात्रवृत्ति वितरण में धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार होने का संदेश जताया है। कैग को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के तहत पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति (PMS) योजना के कार्यान्वयन में धाेखाधड़ी होने का संदेह है।

मंगलवार को राज्य विधानसभा में कैग ने राज्य में पात्र छात्रों को पीएमएस को किए गए भुगतान और डीबीटी के कार्यान्वयन के ऑडिट पर अपनी रिपोर्ट सौंपी। जिसमें कैग ने खुलासा किया कि निजी शैक्षिक निरीक्षण के लिए विस्तृत चेकलिस्ट नहीं उपलब्ध होने के कारण वित्तीय वर्ष 2016-17 से 2016 से 2020 के दौरान, 15 अयोग्य संस्थानों के 5,185 लाभार्थियों को 15.79 करोड़ रुपये की पीएमएस धनराशि दी गई है।
बता दें सामाजिक न्याय और आधिकारिता मंत्रालय ने मई 2018 में जारी अपने संशोधित दिशा-निर्देशों मे जिला कलेक्टर द्वारा नामित अधिकारियों से निजी शैक्षणिक संस्थानों में निरीक्षण अनिवार्य कर दिया है।
कैग ने अपनी रिपोर्ट मे बताया कि पीएमएस योजना को मंजूरी देने लिए प्राइवेट इंस्टीट्यूशन के निरीक्षण का कोई प्रवाधान नहीं था। ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया कि अभिलेखों की जांच से पता चलता है कि गैर सहायता प्राप्त निजी संस्थानों को शुल्क का भुगतान किया था ये शुल्क विनियमन प्राधिकरण (एफआरए) द्वारा निर्धारित शुल्क से अधिक था।
एफआरए द्वारा निर्धारित शुल्क ऑल इनक्लूसिव फीस थी। हालांकि एफआरए द्वारा निर्धारित शुल्क के अलावा 'अन्य शुल्क' के तहत अलग शुल्क के भुगतान के बाद शैक्षणिक वर्ष 2018-19 और 2019-20 के लिए संस्थानों/छात्रों को 53.41 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति का अधिक भुगतान हुआ।
इस रिपोर्ट में कैग ने खुलासा किया मयूरगंज जिले मेंकी सकुंतला सुदर्शन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी जो तीन साल का डिप्लोमा पाठ्यक्रम कोर्स संचालित कर रहा था जिसमें 2016 से 2020 के दौरान 1,369 छात्रों ने एडमीशन लिया था। इस कॉलेज में ऑडिट टीम ने 2016-19 और 2017-20 बैच के सेमेस्टर के रिजर्ट का विश्लेषण किया और पाया 138 ओर 142 ने अपनी आखिरी परीक्षा नहीं थी, इतना ही नहीं उन्होंने अपनी पढ़ाई बंद कर दी थी, इसके बाजवूद उन्हें 2.36 करोड़ रुपये का पीएमएस भुगतान किया गया है।












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