मूल्य स्थिरीकरण कोष का उपयोग नहीं करने के लिए भाजपा-कांग्रेस ने ओडिशा सरकार पर साधा निशाना
कांग्रेस और बीजेपी के निशाने पर ओडिशा की नवीन सरकार पर आ गई है। ताजा मामला महंगाई नियंत्रित को लेकर है। बीजेपी और कांग्रेस ने कहा कि बीजू जनता दल (बीजेडी) के नेतृत्व वाली ओडिशा सरकार आवश्यक वस्तुओं की मूल्य वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए अपने मूल्य स्थिरीकरण कोष से एक पैसा भी खर्च करने को तैयार नहीं है।
हर साल देर से फसल पकने और प्राकृतिक आपदाओं जैसे कारणों से कुछ वस्तुओं की कीमतें अचानक बढ़ जाती हैं। उपभोक्ताओं पर बोझ कम करने के लिए केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2014-15 में मूल्य स्थिरीकरण कोष का गठन किया था। इस कोष के उपयोग से 22 खाद्य पदार्थों की कीमतों को नियंत्रित किया जाता है।

11 अगस्त को केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के राज्य मंत्री अश्विनी चौबे द्वारा पेश की गई जानकारी के अनुसार पिछले आठ वर्षों में फंड को 27489 करोड़ रुपये मिले हैं। केंद्र सरकार ने इस फंड से खर्च करके प्याज, आटा, खाना पकाने का तेल आदि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को स्थिर करने की कोशिश की।
वहीं, उपभोक्ता मामलों का मंत्रालय राज्यों को अपना मूल्य स्थिरीकरण कोष बनाने के लिए वित्तीय सहायता भी प्रदान कर रहा है। ओडिशा को अब तक 75 करोड़ रुपये मिल चुके हैं। राज्य सरकार ने फंड के लिए 100 करोड़ रुपये का बजट आवंटन भी किया है।
कांग्रेस नेता सुरेश राउत्रे ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार आवश्यक वस्तुओं की मूल्य वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए एक पैसा भी खर्च नहीं कर रही है। आंध्र प्रदेश में प्याज 25 रुपये किलो बिक रहा है। तोरई, बैंगन और भिंडी की कीमतें 50 रुपये से नीचे हैं। ओडिशा में सरकार ऐसा क्यों नहीं कर रही है? इसके बजाय वे अपने विज्ञापनों में पैसा खर्च कर रहे हैं।
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