भाजपा और कांग्रेस ने ओडिशा की पटनायक सरकार पर लगाया आरोप, कहा- बीजेडी को ओबीसी की परवाह नहीं
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में ओबीसी सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी की। बिहार सरकार द्वारा करवाए गए सर्वे के बाद ओडिशा में सत्तारूढ़ बीजू जनता दल (बीजेडी) को विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने घेरा है। विपक्षी पार्टियों ने बीजद सरकार पर आरोप लगाया कि राज्य में ओबीसी की आबादी को लेकर सर्वेक्षण करवाया है लेकिन ओडिशा सरकार ने सर्वे की रिपोर्ट सार्वजनकि नहीं की है।

भाजपा नेता नौरी नायक ने कहा ओडिशा में ओबीसी की आबाद और उनकी वित्तीय, सामाजिक और शैक्षिक स्थिति क पता लगाने के लिए सर्वेक्षण करवाया गया। ये सर्वेक्षण 1 मई से 24 जून तक चला। ये बताया कि ओबीसी सर्वे की रिपोर्ट सरकार को सौंप दी गई है लेकिन ओडिशा सरकार ने अभी तक रिपोर्ट का सार्वजनिक नहीं किया है।
भाजपा नेता गौरी ने आरोप लगाया किया कि ओबीसी सर्वेक्षण पूरी तरह से नहीं किया गया है। इससे समझा जा सकता है कि ओडिशा सरकार में अन्य पिछड़े वर्गों के प्रति प्रतिबद्धता की कमी है।
वहीं कांग्रेस नेता नरसिंह मिश्रा ने कहा ''सरकार ने लंबे समय से आयोग के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए बैठने की व्यवस्था नहीं की थी। बीजद ने आयोग की सहायता के लिए कर्मचारी भी उपलब्ध नहीं कराये। आज भी वे आयोग को सहयोग नहीं कर रहे हैं। वे पूरी तरह से ओबीसी विरोधी हैं।"
हालांकि भाजपा और कांग्रेस के इन आरोपों का जवाब बीजेडी विधायक देबीप्रसाद मिश्रा ने जवाब देते हुए कहा अगर नवीन पटनायक सरकार ओबीसी विरोधी होती तो आयोग का गठन नहीं करती।
बता दें साल की शुरूआत में ही सर्वे की प्रक्रिया तो शुरू कर दी थी। न्यायमूर्ति रघुनाथ बिस्वाल को आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। इस सर्वेक्षण के दौरान 120 जातियों को लेकर उनके बारे में विस्तृत जानकारी एकत्रित की गई। इस रिपोर्ट के अनुसार ओबीसी की आबादी करीब 1.91 करोड़ है। उम्मीद है कि ओडिशा की नवीनन पटनायक सरकार सर्वे रिपोर्ट जल्द सार्वजनिक तौर पर साझाा करेगी।












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