प्रॉपर्टी टैक्स का ऑडिट कराएगी भगवंत मान सरकार, डिफाल्टरों पर कसा जाएगा शिकंजा

पंजाब सरकार ने 2013 में प्रॉपर्टी टैक्स सिस्टम लागू किया था जिसके लिए घरेलू और कमर्शियल के भी कई स्लैब बनाए गए हैं।

भगवंत मान

पंजाब सरकार ने कुछ समय पहले सैद्धांतिक रूप से फैसला लिया था कि राज्य के शहरों में वसूले जाते प्रॉपर्टी टैक्स की कलेक्शन का काम निजी हाथों में सौंप दिया जाएगा परंतु अब राज्य सरकार बड़े शहरों से वसूले जाते प्रॉपर्टी टैक्स का ऑडिट करवाने पर विचार कर रही है। पता चला है कि सरकार के निर्देशों पर सबसे पहले जालंधर के प्रॉपर्टी टैक्स सिस्टम का ऑडिट करवाया जा रहा है जिसके लिए नगर निगम आने वाले दिनों में टैंडर लगा सकता है जिसके माध्यम से ऑडिट करने वाली एजैंसी और चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म का चयन होगा। अगर ऐसा होता है तो इस सिस्टम से वह लोग पकड़ में आएंगे जो जानबूझकर प्रॉपर्टी टैक्स बचाने के लालच में गलत रिटर्न भर रहे हैं।

गौरतलब है कि इस समय जालंधर निगम शहर के लोगों से करीब 35 करोड़ रुपए वार्षिक प्रॉपर्टी टैक्स एकत्रित कर रहा है परंतु कुछ सूत्र यह भी मानकर चल रहे हैं कि यदि सभी लोग ईमानदारी से अपना प्रॉपर्टी टैक्स अदा करें और डिफाल्टरों पर भी सख्ती बरती जाए तो टैक्स कलेक्शन की राशि 100 करोड़ रुपए के करीब तक पहुंच सकती है।

चुपके से करवाया भी गया था टैक्स का ऑडिट
पता चला है कि जालंधर निगम प्रशासन ने कुछ सप्ताह पहले चुपके से शहर की कुछ संपत्तियों का प्रॉपर्टी टैक्स ऑडिट करवाया था। इसके लिए एक सी.ए. की सेवाएं ली गई थीं जिसने एक दिन लगाकर शहर की करीब आधा दर्जन सम्पत्तियों पर जाकर पैमाइश इत्यादि की थी। जब उन सम्पत्तियों का टैक्स रिकॉर्ड चेक किया गया तो उसमें काफी फर्क आया। इस प्रक्रिया दौरान शहर के एक प्रमुख होटल का भी टैक्स जांचा गया तो हेरतअंगेज तथ्य सामने आया कि उस होटल के ऊपरी फ्लोर के कमरों को बंद बताकर प्रॉपर्टी टैक्स भरा जा रहा था।

पी.जी. और किराए वाली सम्पत्तियों से आ रहा कम टैक्स
पंजाब सरकार ने 2013 में प्रॉपर्टी टैक्स सिस्टम लागू किया था जिसके लिए घरेलू और कमर्शियल के भी कई स्लैब बनाए गए हैं। जालंधर निगम के पार्षद हाऊस ने प्रस्ताव पारित करके पी.जी. से भी कमर्शियल टैक्स वसूलने का फैसला लिया था परंतु पता चला है कि जालंधर निगम अभी तक किसी पी.जी. से कमर्शियल प्रॉपर्टी टैक्स नहीं वसूल पा रहा।

इसी प्रकार जिस प्रॉपर्टी को भारी किराए पर चढ़ाया जाता है, वहां कइयों का किरायानामा भी कम शो करके कम टैक्स भरा जा रहा है। ज्यादातर लोग अपनी दुकानों और कमर्शियल संस्थानों को बंद शो करके कम टैक्स भर रहे हैं। माना जा रहा है कि अगर प्राइवेट एजैंसी के माध्यम से ऑडिट होता है तो हजारों की संख्या में डिफाल्टर और कम टैक्स भरने वाले पकड़ में आ सकते हैं जिससे निगम के खजाने में काफी वृद्धि होगी।

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