हर जिले में बने ऑटिज्म केंद्र, डॉक्टरों ने की तेलंगाना सरकार से मांग
कट अद्वैया ने कहा, 'सिकंदराबाद में स्थित राष्ट्रीय मानसिक विकलांग संस्थान भी कर्मचारियों और उपकरणों की कमी झेल रहा है। प्रदेश के 33 जिलों से बच्चे वहां इलाज के लिए आते हैं।

तेलंगाना सरकार का अनुमान है कि राज्य में करीब 5 लाख बच्चे ऑटिज्म से पीड़ित हैं, और इसके लिए सरकार के हस्तक्षेप की आवश्यकता है। चूंकि कोई भी सरकारी केंद्र इन बच्चों की जरूरतों को पूरा नहीं कर सकता है, जिसकी वजह से निजी क्लीनिक माता-पिता से प्रति माह 15,000 रुपये से 50,000 रुपये तक फीस ले रहे हैं।
विश्व ऑटिज्म दिवस के अवसर पर ऑटिज्म में सरकार की भूमिका पर चर्चा करने के लिए विकलांगों के अधिकारों के लिए राष्ट्रीय मंच (एनपीआरडी) द्वारा रविवार को यहां आयोजित एक सम्मेलन में विशेषज्ञों ने निजी क्लीनिकों द्वारा ओवरचार्जिंग पर अंकुश लगाने के लिए एक सरकारी पर्यवेक्षी निकाय की आवश्यकता पर जोर दिया।
सम्मेलन में बोलते हुए, एनपीआरडी के तेलंगाना राज्य अध्यक्ष के वेंकट अद्वैया ने कहा कि कुछ स्वैच्छिक और निजी संगठन ऑटिस्टिक बच्चों के इलाज के लिए विशेष केंद्र चला रहे हैं। राज्य भर में सैकड़ों निजी क्लीनिक चल रहे हैं। जिन परिवारों के पास आर्थिक संसाधन नहीं हैं, उन्हें अपने बच्चों के इलाज में कठिनाई का सामना करना पड़ता है।
वेंकट अद्वैया ने कहा, 'सिकंदराबाद में स्थित राष्ट्रीय मानसिक विकलांग संस्थान (एनआईएमएच) भी कर्मचारियों और उपकरणों की कमी झेल रहा है। प्रदेश के 33 जिलों से बच्चे वहां इलाज के लिए आते हैं। मैं सरकारी अस्पतालों से तीन साल की उम्र के बच्चों पर ऑटिज़्म परीक्षण करने और मुफ्त चिकित्सा केंद्र स्थापित करने का आग्रह करता हूं।'
वहीं, ये भविष्यवाणी करते हुए कि निकट भविष्य में हर सात में से एक बच्चा ऑटिज़्म से पीड़ित होगा, प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक और ऑटिज़्म चिकित्सक डॉ ईवीवी राजशेखर ने भी कहा कि यह एकदम सही समय है जब हर जिले में चिकित्सा केंद्र स्थापित किए जाएं।












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