Sawan 2023: सावन में क्यों होती है शिव की पूजा? क्या है 'श्रावण' का मतलब?
Why Lord Shiva Loves Sawan?: शिव-शंभू का प्रिय महीना 'सावन' चार जुलाई से प्रारंभ हो गया है। 'अधिकमास' की वजह से 'सावन' 59 दिनों का है और इसलिए इस बार इस महीने में आठ सोमवार आएंगे। माना जाता है कि इस मास में शिवजी की पूजा सच्चे मन से करने पर इंसान के सारे कष्टों का अंत होता है और उसकी हर मनोकामना पूरी होती है। लेकिन क्या कभी आपने सोचा कि 'सावन' आखिर शिव को क्यों प्रिय है और इस महीने का नाम 'श्रावण'क्यों है?

आपको बता दें कि 'सावन' का महीना 'दक्षिणायन' को इंगित करता है, जिसके स्वामी 'महादेव' हैं, इसी वजह से इस महीने में उनकी पूजा होती है।
शिव को 'सावन' पसंद है...
दूसरी अहम बात 'शिवलिंग' पर चढ़ने वाले बिल्वपत्र वगैरह भी बरसात के ही महीने में आते हैं और ये माह मानसून सीजन वाला है, जब जमकर मेघ बरसते हैं इसलिए शिव को 'सावन' पसंद है। इस महीने का जिक्र 'स्कंद पुराण' में भी मिलता है।
पूर्णिमा को 'श्रवण' नक्षत्र
रही बात इसके नाम की तो इसके पीछे कई कहानी बताई जाती है। शिवपुराण के मुताबिक इस महीने की पूर्णिमा को 'श्रवण' नक्षत्र आता है इसलिए इस महीने का नाम 'श्रावण' है।
'श्रवण' का दूसरा अर्थ सुनना
तो वहीं दूसरी मान्यता के मुताबिक ये महीना पूजा पाठ के लिए काफी महत्वपूर्ण है और इसका महत्व सुनने योग्य होता है अब चूंकि 'श्रवण' का दूसरा अर्थ सुनना होता है इसलिए इस महीने का नाम 'श्रावण' पड़ा है।
शिव-पार्वती के मिलन का महीना
जबकि एक मान्यता के मुताबिक ये महीना शिव-पार्वती के मिलन का महीना है। पार्वती जी ने शिव को पाने के लिए कठोर तप किया था जिसके बाद शिव जी ने उन्हें दर्शन दिए थे, जब वो उनके समक्ष प्रकट हुए थे, वो महीना 'सावन' का था।
'सावन' में ससुराल घूमते हैं भोलेनाथ
तो वहीं एक और कहानी के मुताबिक 'सावन' के महीने में शिव-शंभू अपने पूरे दल-बल के साथ अपने ससुराल पधारे थे, जहां उनका बहुत मान-सम्मान किया गया था इसलिए इस महीने में उनकी विशेष पूजा की जाती है। कुल मिलाकर सार सिर्फ इतना है कि ये महीना प्रभु के प्रति अपनी आस्था और विश्वास को प्रकट करने का है। सच्चे मन से की गई पूजा से कोई भी भगवान का आशीष पा सकता है।
सावन में कीजिए इन मंत्रों से शिव की पूजा
- ॐ नम: शिवाय।
- ॐ शिवाय नमः
- ॐ शंकराय नमः ।
- ॐ महादेवाय नमः।
- ॐ महेश्वराय नमः।
- ॐ श्री रुद्राय नमः।
- ॐ नील कंठाय नमः।
- ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥












Click it and Unblock the Notifications