Vijaya Ekadashi 2021: विजया एकादशी 9 मार्च को, जानिए महत्व
नई दिल्ली। फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी के नाम से जाना जाता है। अपने नाम के अनुरूप इस एकादशी का व्रत करने से सभी कार्यो में जीत प्राप्त होती है। इस एकादशी का व्रत उन लोगों को अवश्य करना चाहिए जिनके कोई काम पूरे नहीं हो पाते हैं। चलते-चलते काम अटक जाते हैं। आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं रहती और किसी भी कार्य में सफलता नहीं मिल पाती। ऐसे लोग यदि पूरे विधि विधान से विजया एकादशी का व्रत रखें तो उनकी सारी इच्छाएं पूरी होती है। यह एकादशी शत्रुओं पर विजय दिलाती है। साथ इस जन्म और पूर्व जन्म में अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति दिलाती है। विजया एकादशी 9 मार्च 2021 मंगलवार को आ रही है। लंका विजय के लिए जाते समय भगवान राम ने भी इस एकादशी का व्रत किया था।

विजया एकादशी कब से कब तक
- एकादशी प्रारंभ 8 मार्च दोपहर 3.45 बजे से
- एकादशी पूर्ण 9 मार्च दोपहर 3.02 बजे तक
- व्रत का पारण 10 मार्च प्रात: 6.37 से 8.59 बजे तक
एकादशी व्रत की विधि
फाल्गुन कृष्ण विजया एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा षोडशोपचार विधि से करें। पूजा में पीले पुष्प अर्पित करें। शुद्ध घी से बनी मिठाई का नैवेद्य लगाएं। विजया एकादशी व्रत की कथा सुनें। पूरे दिन निराहर रहकर भगवान विष्णु के मंत्रों का मानसिक जाप करते रहें। मन में किसी के प्रति बुरे विचार ना आने दें। संयम का पालन करें। रात्रि में जागरण करते हुए भगवान के भजन करें। दूसरे दिन व्रत का पारण करें। किसी ब्राह्मण दंपती को बुलाकर भोजन करवाएं। उनके पाद पूजन कर उचित दान-दक्षिणा देकर आशीर्वाद प्राप्त करें। इसके बाद स्वयं व्रत खोलें।
भगवान राम ने किया था विजया एकादशी का व्रत
शास्त्रों में उल्लेख है किविजया एकादशी का व्रत स्वयं भगवान राम ने भी किया था। त्रेता युग में जब भगवान राम लंका पर चढ़ाई करने के लिए विजया एकादशी के दिन ही समुद्र तट पर पहुंचे थे तब समुद्र ने भगवान राम ने समुद्र से मार्ग देने की प्रार्थना की, लेकिन समुद्र मार्ग देने को तैयार नहीं हुआ तब श्रीराम ने जामवंत व अन्य ऋ षियों की आज्ञा से विजया एकादशी का व्रत किया। एकादशी का व्रत पूर्ण होने पर दूसरे दिन प्रात: समुद्र ने श्रीराम और उनकी सेना के लिए लंका जाने का मार्ग दे दिया।












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