Vaishakh Purnima 2025: वैशाख स्नान पूर्ण, जानिए अब क्या करें और क्या ना करें
Vaishakh Purnima 2025: वैशाख पूर्णिमा आज है। चैत्र पूर्णिमा से वैशाख पूर्णिमा तक एक मास हिंदू धर्मावलंबियों द्वारा वैशाख स्नान किया जाता है। पूरे वैशाख मास में सूर्योदय के पूर्व तारों के प्रकाश में स्नान किया जाता है और फिर भगवान विष्णु, शिव और श्रीकृष्ण का पूजन किया जाता है।
वैशाख स्नान के बारे में गरुड़ पुराण, पद्म पुराण और स्कंद पुराण में वर्णन मिलता है कि वैशाख स्नान करने से सहस्त्रों यज्ञ, दान और व्रतों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।

वैशाख स्नान को जन्म जन्मांतर के पापों का क्षय करने वाला कहा गया है। वैशाख स्नान चैत्र पूर्णिमा 12 अप्रैल से प्रारंभ हुआ था और अब यह 12 मई 2025 वैशाख पूर्णिमा पर पूर्ण हो रहा है।
वैशाख स्नान पूर्ण होने पर क्या करें
एक मास तक जिन लोगों ने संकल्प लेकर वैशाख स्नान किया है। वे 12 मई को इसकी पूर्णाहुति करेंगे। चंद्र के प्रिय नक्षत्र स्वाति और चंद्र के ही दिन सोमवार को आ रही पूर्णिमा के दिन सबसे पहले सूर्योदय पूर्व स्नान करें। यह स्नान किसी पवित्र नदी में संपन्न करें तो अधिक शुभ अन्यथा अपने घर में ही जल में गंगा, यमुना, नर्मदा, क्षिप्रा, कावेरी आदि पवित्र नदियों का जल डालकर स्नान करें। स्नान करने के बाद शुद्ध श्वेत वस्त्र पहनें।
छाता, चप्पल, पंखा, इत्र आदि वस्तुओं का दान करें
इसके बाद दान करें। अन्न, वस्त्र, जलकुंभ, छाता, चप्पल, पंखा, इत्र आदि वस्तुओं का दान इस पूर्णिमा के दिन अवश्य करना चाहिए। वैशाख पूर्णिमा के दिन प्याऊ लगवाना, पशु-पक्षियों के लिए जल का प्रबंध करने का विशेष महत्व होता है।
व्रतोद्यापन के बाद ब्राह्मणों को भोजन करवाना चाहिए
इस दिन एक मास से चल रहे व्रत का उद्यापन करना चाहिए। यह उद्यापन किसी विद्वान पुरोहित, ब्राह्मण के द्वारा विधि विधान से संपन्न करवाएं। व्रतोद्यापन के बाद ब्राह्मणों को भोजन करवाना चाहिए। उनका पूजन कर उचित दान-दक्षिणा देकर आशीर्वाद प्राप्त करें।
विशेष
वैशाख पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण का पूजन करें और उन्हें पीले पुष्प, तुलसीदल आदि अर्पित करें। इस दिन श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ या सत्यनारायण कथा का आयोजन अवश्य करना चाहिए।












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