Utpanna Ekadashi 2022 Mantra: उत्पन्ना एकादशी आज, कीजिए इन मंत्रों और आरती से पूजा, मिलेगा धन-लाभ
Utpanna Ekadashi Mantra and Aarti (उत्पन्ना एकादशी) : आज मार्गशीर्ष मास की एकादशी है, जिसे कि उत्पत्ति या उत्पन्ना एकादशी कहा जाता है। आज के दिन भगवान विष्णु के साथ भगवान श्रीकृष्ण की भी पूजा की जाती है। कहते हैं इस दिन पूजा करने से भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है। आज के खास दिन भगवान विष्णु और कृष्ण दोनों की विशेष मंत्रों के साथ पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से जातक को धन के साथ हर तरह का सुख प्राप्त होता है और वो तरक्की के मार्ग पर अग्रसर होता है।

यहां है एकादशी मंत्र
- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
- श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे।
- हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।
- ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।
- ॐ विष्णवे नम:
- ॐ हूं विष्णवे नम:
- 'हरे कृष्ण हरे कृष्ण । कृष्ण कृष्ण हरे हरे ।
- हरे राम हरे राम । राम राम हरे हरे ॥'
- ॐ श्री कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजन वल्लभाय नमः
- ॐ श्री कृष्णाय नमः।

भगवान विष्णु की आरती
- ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
- भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥
- जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
- सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥
- मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
- तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय...॥
- तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
- पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय...॥
- तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
- मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय...॥
- तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
- किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय...॥
- दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
- अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय...॥
- विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
- श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥
- तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
- तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय...॥
- जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
- कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय...॥

भगवान कृष्ण की आरती
- आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की।
- गले में बैजन्ती माला, बजावै मुरली मधुर बाला।
- श्रवन में कुंडल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला।।
- नैनन बीच, बसहि उरबीच, सुरतिया रूप उजारी की ।।
- आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की।
- गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली।
- लतन में ठाढ़ै बनमाली, भ्रमर सी अलक।
- कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक, ललित छबि श्यामा प्यारी की।।
- आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की।
- कनकमय मोर मुकट बिलसे, देवता दरसन को तरसे।
- गगनसों सुमन रासि बरसै, बजे मुरचंग मधुर मिरदंग।।
- ग्वालनी संग, अतुल रति गोप कुमारी की।।
- आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की।
- जहां ते प्रकट भई गंगा, कलुष कलि हारिणि श्री गंगै
- स्मरन ते होत मोह भंगा, बसी शिव सीस जटाके बीच।
- हरै अघ कीच, चरन छबि श्री बनवारी की।।
- आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की।
- चमकती उज्जवल तट रेनू, बज रही वृन्दावन बेनू।
- चहुं दिसि गोपी ग्वाल धेनू, हसत मृदु मंद चांदनी चंद ।
- कटत भव फंद, टेर सुनु दीन भिखारी की।।
- आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की।
एकादशी आरती
- ॐ जय एकादशी, जय एकादशी, जय एकादशी माता ।
- विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता ।। ॐ।।
- तेरे नाम गिनाऊं देवी, भक्ति प्रदान करनी ।
- गण गौरव की देनी माता, शास्त्रों में वरनी ।।ॐ।।
- मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना, विश्वतारनी जन्मी।
- शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा, मुक्तिदाता बन आई।। ॐ।।
- पौष के कृष्णपक्ष की, सफला नामक है,
- शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा, आनन्द अधिक रहै ।। ॐ ।।
- नाम षटतिला माघ मास में, कृष्णपक्ष आवै।
- शुक्लपक्ष में जया, कहावै, विजय सदा पावै ।। ॐ ।।
- विजया फागुन कृष्णपक्ष में शुक्ला आमलकी,
- पापमोचनी कृष्ण पक्ष में, चैत्र महाबलि की ।। ॐ ।।
- चैत्र शुक्ल में नाम कामदा, धन देने वाली,
- नाम बरुथिनी कृष्णपक्ष में, वैसाख माह वाली ।। ॐ ।।
- शुक्ल पक्ष में होय मोहिनी अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी,
- नाम निर्जला सब सुख करनी, शुक्लपक्ष रखी।। ॐ ।।
- योगिनी नाम आषाढ में जानों, कृष्णपक्ष करनी।
- देवशयनी नाम कहायो, शुक्लपक्ष धरनी ।। ॐ ।।
- कामिका श्रावण मास में आवै, कृष्णपक्ष कहिए।
- श्रावण शुक्ला होय पवित्रा आनन्द से रहिए।। ॐ ।।
- अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की, परिवर्तिनी शुक्ला।
- इन्द्रा आश्चिन कृष्णपक्ष में, व्रत से भवसागर निकला।। ॐ ।।
- पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में, आप हरनहारी।
- रमा मास कार्तिक में आवै, सुखदायक भारी ।। ॐ ।।
- देवोत्थानी शुक्लपक्ष की, दुखनाशक मैया।
- पावन मास में करूं विनती पार करो नैया ।। ॐ ।।
- परमा कृष्णपक्ष में होती, जन मंगल करनी।।
- शुक्ल मास में होय पद्मिनी दुख दारिद्र हरनी ।। ॐ ।।












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