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Surdas Jayanti 2023: आज है सूरदास जयंती, जानिए पूजा-विधि और महत्व, जरूर पढ़ें ये दोहे

Surdas Jayanti 2023: सूरदास सगुण शाखा के कृष्णाश्रयी कवि थे, जिन्होंने कृष्ण भक्ति पर अपनी रचनाएं लिखी हैं।

Surdas Jayanti 2023:

Surdas Jayanti 2023: सूरदास हिंदी साहित्य के प्रख्यात कवियों में एक हैं। भक्ति सागर के लोकप्रिय कवियों में से एक सूरदास के दोहे इंसान की आत्मा को छू जाते हैं। वो भगवान कृष्ण के परम भक्त थे। हर साल वैशाख मास की पंचमी को उनका जन्मदिवस मनाया जाता है इसलिए आज का दिन बेहद पावन है।

इंसान को ज्ञान की प्राप्ति होती है

आज के दिन सूरदास और भगवान कृष्ण की सच्चे मन से पूजा करने से इंसान को ज्ञान की प्राप्ति होती है। वो सुखी और तेजस्वी बनता है। सूरदास की सटीक जन्म तिथि विवाद है लेकिन विशेषज्ञों का मानना ​​है कि उनका जन्म वर्ष 1478 था।

मोहक छंद और पद

कहा जाता है कि सूरदास जी बचपन से नेत्रहीन थे और इस वजह से उनके घर वाले उन्हें प्रेम नहीं करते थे। इसी बात से दुखी होकर उन्होंने अपने घर को छोड़ दिया था और आगरा एक गांव में रहने लगे थे लेकिन वो भगवान कृष्ण की भक्ति में ऐसा लीन हुए कि उन्होंने अपने मोहक छंद और पद से लोगों को अपना मुरीद बना लिया। उनकी रचनाएं सुनने के बाद किसी को भी यकीन नहीं होता कि सूरदास देख नहीं सकते थे और उन्होंने कभी भी भगवान कृष्ण के दर्शन नहीं किए।

सूरदास ने पांच ग्रंथों की रचना की थी, जिसके नाम निमलिखित हैं...

  • सूरसागर
  • सूरसारावली
  • साहित्य-लहरी
  • नल-दमयन्ती
  • ब्याहलो

यहां पेश है सूरदास के कुछ प्रचलित दोहे

चरण कमल बंदो हरी राइ।
जाकी कृपा पंगु गिरी लांघें अँधे को सब कुछ दरसाई॥

मैं नहि माखन खायौ

  • मैया मोहि मैं नहि माखन खायौ,
  • भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो,
  • चार पहर बंसीबट भटक्यो, साँझ परे घर आयो।।
  • मैं बालक बहियन को छोटो, छीको किही बिधि पायो,
  • ग्वाल बाल सब बैर पड़े है, बरबस मुख लपटायो।।

माला-तिलक मनोहर बाना

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    • गुरू बिनु ऐसी कौन करै।
    • माला-तिलक मनोहर बाना, लै सिर छत्र धरै।
    • भवसागर तै बूडत राखै, दीपक हाथ धरै।
    • सूर स्याम गुरू ऐसौ समरथ, छिन मैं ले उधरे।।
    • सदा सूँघती आपनो, जिय को जीवन प्रान।
    • सो तू बिसर्यो सहज ही, हरि ईश्वर भगवान्॥

    चित न भयो रस भंग

    • दीपक पीर न जानई, पावक परत पतंग।
    • तनु तो तिहि ज्वाला जरयो, चित न भयो रस भंग॥

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