Skanda Shashthi Vrat 2025: स्कंद षष्ठी व्रत आज, संतान सुख चाहिए तो करें इस विधि से पूजा
Skanda Shashthi Vrat 2025: चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को स्कंद षष्ठी व्रत किया जाता है। यह व्रत भगवान शिव और देवी पार्वती के पुत्र कार्तिकेय को समर्पित है। यह व्रत नि:संतान दंपतियों की गोद भर देता है। स्कंद षष्ठी व्रत उन महिलाओं को अवश्य करना चाहिए जो उत्तम संतान की आकांक्षी है। इस व्रत के प्रभाव से रोग भी दूर होते हैं। यह व्रत 3 अप्रैल 2025 गुरुवार को किया जाएगा।

स्कंद षष्ठी की पूजा कैसे करें (Skanda Shashthi Vrat)
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। अपने घर के पूजा स्थल को साफ करें। अपनी नित्य दैनिक पूजा करने के बाद भगवान कार्तिकेय की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। धूप-दीप जलाकर भगवान का अभिषेक करें। भगवान को चंदन, अक्षत, फूल आदि अर्पित करें। ध्यान रहें।
भगवान कार्तिकेय को मोर पंख अवश्य अर्पित करें
भगवान कार्तिकेय को मोर पंख अवश्य अर्पित करें। मोरपंख उन्हें अत्यंत प्रिय है। इसके बाद ऊं स्कंदाय नमः मंत्र की एक माला जाप करें। षष्ठी कवच का पाठ करें।
मिष्ठान्न और फलों का भोग लगाएं
कर्पूर से भगवान कार्तिकेय की आरती करें। मिष्ठान्न और फलों का भोग लगाएं। मनोकामना पूर्ति के लिए प्रार्थना करें। संध्या में फिर से पूजा करें। अगले दिन पूजा करके व्रत का पारण करें। स्कंद षष्ठी व्रत में एक समय भोजन ग्रहण किया जा सकता है। दिन में फलाहार किया जा सकता है।
स्कंद षष्ठी व्रत के लाभ (Skanda Shashthi Vrat)
- यह व्रत मुख्य रूप से संतान की प्राप्ति के लिए किया जाता है। जिन दंपतियों को संतान सुख नहीं मिला है। वे जोड़े से स्कंद षष्ठी व्रत करें। पूरे विधि विधान से की गई पूजा व्रत उन्हें संतान सुख प्रदान करता है।
- यह व्रत उन दंपतियों को भी करना चाहिए जिनकी संतान गलत मार्ग पर चली गई हैं। संतान को सही मार्ग पर लाने के लिए यह व्रत किया जाता है।
सात दिन में रोग में आराम होने लगता है (Skanda Shashthi Vrat)
- रोग दूर करने के लिए भी यह व्रत किया जाता है। जिन परिवारों में कोई व्यक्ति भयानक रोग से पीड़ित है वे लोग यह व्रत रखें और पूजा में सात मोर पंख रखें। पूजा के अगले दिन इन मोर पंख को रोगी के तकिये में डाल दें और उसी तकिए को रोगी को लगाने को कहें। सात दिन में रोग में आराम होने लगता है।
- स्कंद षष्ठी व्रत करने से ग्रह दोष भी शांत होते हैं। इस व्रत को करने से शनि, कालसर्प, ग्रहण दोष आदि से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-शांति आती है।












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