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100 साल से अधिक पुराने मंदिर में ड्रेस पर नोटिस, 5 ऐसे मंदिरों को जानिए जहां कपड़ों पर है सख्त निगरानी

Shimla Jain Temple श्रद्धालुओं के ड्रेस की नोटिस के कारण चर्चा में है। मंदिर प्रशासन ने कहा है कि मंदिर आकर दर्शन करने वाले लोगों को मर्यादित वेशभूषा का ध्यान रखना चाहिए। मंदिर 100 साल से अधिक पुराना बताया जाता है।

एक सदी पुराने जैन मंदिर में छोटे कपड़े पहनकर प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने पर अधिकारियों ने कहा, अनुशासन, मर्यादा और हिंदू संस्कृति के मूल्य बनाए रखने की जरूरत है। श्री दिगंबर जैन सभा द्वारा संचालित यह मंदिर जैन समुदाय के लोगों में लोकप्रिय है।

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100 साल से अधिक पुराने मंदिर में ड्रेस कोड को लेकर जारी निर्देश पर नियमित दर्शन को आने वाले स्थानीय निवासी ने बताया, "यह 100 साल पुराना मंदिर है। यह फैसला हमारी परंपरा को दर्शाता है।"

भक्तों के अनुसार, छोटे कपड़ों में मंदिर जाने वाले इन पूजा स्थलों से जुड़े रीति-रिवाजों और परंपराओं का उल्लंघन कर रहे हैं। भक्त हर्ष जैन ने कहा, "हमारी संस्कृति इसकी अनुमति नहीं देती है (कम लंबाई के कपड़े पहनना)। जब मंदिरों की बात आती है, तो नियमों का पालन करने की जरूरत होती है।

उन्होंने कहा, "हम पश्चिमी संस्कृति को अपना रहे हैं और अपने को भूल रहे हैं।" जैन मंदिर शिमला के पंडित संजय कुमार जैन ने समाचार एजेंसी ANI से कहा, पश्चिमी आदतों और संस्कृति का प्रवाह हमारे धार्मिक मूल्यों का क्षरण कर रहा है।

संजय के अनुसार, पहले हमारे बुजुर्ग शालीन कपड़ों में मंदिरों में जाते थे लेकिन अब युवा लड़के-लड़कियों के साथ-साथ वयस्क महिलाएं भी कम लंबाई के कपड़ों में मंदिरों में जाती हैं। यह अच्छा नहीं है।

शिमला के ऐतिहासिक जैन मंदिर के फैसले के आलोक में जानिए भारत के ऐसे 5 मंदिर जहां कपड़ों को लेकर सख्त निगरानी होती है। ऐसे मंदिर महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, केरल, तमिलनाडु जैसे प्रदेशों में बड़ी संख्या में हैं।

पुरुषों को धोती, महिलाओं को साड़ी-सलवार-सूट

महाराष्ट्र के महाबलेश्वर में बड़ी संख्या में देवाधिदेव महादेव के उपासक आते हैं। इस मंदिर में प्रवेश के समय पायजामा, हैट, कैप और जींस, पैंट जैसे परिधानों की परमिशन नहीं है। पुरुषों को धोती और महिलाओं को साड़ी या सलवार सूट पहनने पर ही मंदिर में दर्शन के लिए प्रवेश मिलता है।

पुरुषों के लिए महादेव के दर्शन का अनोखा नियम

वैसे तो भगवान शिव को औघड़ कहा जाता है, लेकिन महाराष्ट्र में उनकी उपासना का प्रमुख केंद्र घृष्णेश्वर महादेव मंदिर में भी श्रद्धालुओं के लिए ड्रेस के सख्त नियम हैं। इस मंदिर में महादेव के दर्शन के लिए महिलाओं को ट्रेडिशनल ड्रेस पहनना अनिवार्य है। पुरुषों के संबंध में रिपोर्ट्स के अनुसार, केवल कमर के नीचे कपड़े पहनने पर ही दर्शन होंगे। मंदिर में बेल्ट, पर्स औऱ चमड़े की चीजें बैन हैं।

महाकाल की नगरी में भी नियम-शर्तें लागू

हाल ही में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश के उज्जैन में महाकाल कॉरिडोर का लोकार्पण किया तो इसकी खूब चर्चा हुई। देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में गिने जाने वाले उज्जैन के महाकाल के दर्शन-अभिषेक के लिए महिलाओं को साड़ी पहननी होती है। पुरुषों के लिए धोती कुर्ता पहनने का नियम है।

बालाजी के दरबार में कैसे कपड़ों की मनाही

आंध्र प्रदेश जाने वाले अधिकांश श्रद्धालु तिरुपति बालाजी के दर्शन जरूर करते हैं। इस मंदिर में पुरुषों के हाफ पैंट पहनने पर पाबंदी है। शॉर्ट्स और टीशर्ट पहनकर दर्शन करने की मनाही है। महिलाओं को दर्शन के लिए अनिवार्य रूप से साड़ी या सलवार सूट पहनने का नियम है।

केरल के कृष्ण मंदिर में दर्शन के नियम

प्रधानमंत्री के दौरौं के बाद कई धार्मिक केंद्र केंद्र पर्यटकों और श्रद्धालुओं की विशलिस्ट या ड्रीम डेस्टिनेशन में शामिल हो चुके हैं। इनमें एक है केरल का गुरुवायुर कृष्ण मंदिर। इस मंदिर में दर्शन की अभिलाषा रखने वाले लोगों को ड्रेस कोड फॉलो करना होता है। पुरुषों को लुंगी पहननी होती है, जबकि महिलाओं को साड़ी या सलवार सूट पहनने के बाद ही मंदिर में प्रवेश मिलता है। पीएम मोदी को भी इस मंदिर में दक्षिण भारतीय शैली में धोती पहने देखा गया था।

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