Satyanarayan Vrat 2023: अटके काम बनाता है 'सत्यनारायण व्रत'
Satyanarayan Vrat Benefits:'सत्यनारायण व्रत' समस्त संकटों का नाश करता है। अपने जिस संकट के निवारण के लिए यह व्रत किया जाता है, वह अवश्य दूर होता है।

Satyanarayan Vrat 2023: सत्यनारायण व्रत एक ऐसा व्रत हैं जिसे करने से जीवन के सारे संकट दूर हो जाते हैं। घर-परिवार में सुख-शांति व्याप्त होती है और धन का अभाव दूर हो जाता है। जिन युवक-युवतियों का विवाह नहीं हो रहा है वे यदि यह व्रत करें तो उनके शीघ्र विवाह की बात बन जाती है। सत्यनारायण भगवान विष्णु का ही एक नाम है और इस दिन उन्हीं की पूजा की जाती है। सत्यनारायण व्रत पूर्णिमा के दिन किया जाता है। नव संवत्सवर 2080 का प्रथम सत्यनारायण व्रत चैत्र शुक्ल पूर्णिमा आज है। आज पूर्णिमा तिथि प्रात: 9 बजकर 18 मिनट से हो प्रारंभ हो गई है जो कि 6 अप्रैल को प्रात: 10 बजकर 6 मिनट पर समाप्त होगी।
सत्यनारायण व्रत की पूजा विधि
सत्यनारायण व्रत के दिन प्रात: जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर अपने घर के पूजा स्थान को साफ-स्वच्छ कर लें। पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें। पूजा स्थान में एक चौकी या बाजोट पर लाल कपड़ा बिछाएं। इस पर भगवान सत्यनारायण का चित्र या मूर्ति स्थापित करें। चौकी के चारों ओर केले के पत्ते बांधकर पुष्पों से सुंदर मंडप सजाएं। चौकी पर जल से भरा कलश रखें, उस पर श्रीफल रखें और देसी घी का दीपक लगाएं। इसके बाद सर्वप्रथम भगवान गणेश का पूजन करें, फिर कलश पूजन करें। फिर हाथ में अक्षत, सिक्का, सुपारी और पुष्प लेकर व्रत का संकल्प लें।
सत्यनारायण भगवान को स्नान करवाएं
फिर पंचामृत से सत्यनारायण भगवान को स्नान करवाएं, फिर शुद्ध जल से स्नान करवाएं। इसके बाद पंचोपचार या षोडशोपचार पूजन करें। केले, पपीता, पंचामृत, हलवा का नैवेद्य लगाएं। सत्यनारायण व्रत की कथा सुनें और फिर आरती कर प्रसाद वितरण करें। नैवेद्य में तुलसी पत्र अवश्य डालें। यह व्रत बंधु-बांधवों, स्वजनों के साथ किया जाता है। कथा श्रवण करने परिवार वालों के अलावा आसपास के लोगों को भी बुलाएं। सत्यनारायण व्रत में दिनभर निराहार रहें, फलाहार ग्रहण कर सकते हैं। रात्रि में चंद्र दर्शन करें, चंद्र पूजन करें। अगले दिन व्रत खोलें।
सत्यरानायण व्रत के लाभ
- यह व्रत जीवन में संयम, धैर्य, सहनशीलता, सदाचार में वृद्धि करता है।
- परिवार में सामंजस्य स्थापित करने, सुख-सौहार्द बढ़ाने में यह व्रत सहायता करता है।
- अविवाहितों के विवाह में आ रही बाधाएं इस व्रत से दूर हो जाती है।
- धन का अभाव दूर होता है। संपत्ति सुख प्राप्त होता है।












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