Bharani Shraddha 2021: क्या होता है 'भरणी श्राद्ध', क्या है इसका महत्व?
नई दिल्ली, 23 सितंबर। इस वक्त पितरों के श्राद्ध का महीना चल रहा है। वैसे तो इन दिनों लोग अपने-अपने हिसाब से अपने पूर्वजों का श्राद्ध करते हैं लेकिन कुछ विशेष दिन होते हैं, जिस दिन पितरों का श्राद्ध करने से पूर्वज खुश होते हैं और परिवार पर अपना आशीष बनाएं रखते हैं। ऐसा ही एक दिन है भरणी श्राद्ध, जो कि 24 सितंबर को है।
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भरणी श्राद्ध 2021: ये है समय और मुहूर्त
- महा भरणी श्राद्ध शुक्रवार, 24 सितंबर 2021
- कुटुप (कुतुप) मुहूर्त - 11:49 AM to 12:38 PM
- रोहिना (राहुण) मुहूर्त - दोपहर 12:38 बजे से दोपहर 01:26 बजे तक
- अपराहन काल - 01:26 अपराह्न से 03:51 अपराह्न
- भरणी नक्षत्र प्रारंभ - 08:54 पूर्वाह्न 24 सितंबर 2021
- भरणी नक्षत्र समाप्त - 25 सितंबर 2021 को पूर्वाह्न 11:33
क्या है भरणी श्राद्ध (Bharani Shraddha 2021) का महत्व
आमतौर पर भरणी नक्षत्र श्राद्ध व्यक्ति की मृत्यु के बाद एक बार किया जाता है लेकिन धर्मसिंधु के अनुसार इसे हर साल भी किया जा सकता है। भरणी श्राद्ध को महा भरणी श्राद्ध के नाम से जाना जाता है इसके पीछे भी एक खास वजह है, दरअसल यमराज को भरणी नक्षत्र का देवता माना जाता है इसलिए इसका मान बहुत ज्यादा है। जो लोग कभी भी जीवन में तीर्थ यात्रा पर नहीं गए या किसी धर्म स्थल की पूजा नहीं की, उनकी मृत्यु के बाद ये श्राद्ध करना बहुत जरूरी है, क्योंकि ऐसा करने से इंसान की आत्मा को इन सभी धर्मस्थलों की पूजा का फल मिलता है।
कालसर्प दोष से मुक्ति
भरणी श्राद्ध करने से इंसान को कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है और इंसान पितृदोष से भी मुक्त हो जाता है। इस श्राद्द का वर्णन कूर्म पुराण, अग्नि पुराण और वायु पुराण में हैं। इस श्राद्ध को करने से इंसान शारीरिक, मानसिक, पारिवारिक और आर्थिक कष्ट से मुक्त होता है। कहते हैं इस श्राद्ध को करने से इंसान को गया में श्राद्ध करने वाला फल मिलता है।












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