Panchak 2023 List: वर्ष 2023 में पंचक कब-कब आएगा?
2023 में पंचक कब है? (Panchak Start and End Dates): पंचक दरअसल पांच नक्षत्रों का समूह होता है। हर दिन एक नक्षत्र होता है इसलिए पांच नक्षत्रों के समूह को पंचक कहा जाता है।

2023 Me Panchak Kab Hai: हिंदू संस्कृति में मुहूर्त का बड़ा महत्व है। प्रत्येक कार्य करने से पहले मुहुर्त देखने का विधान है और मुहूर्त शास्त्र में सबसे अधिक महत्व पंचक को दिया जाता है। पंचक को लेकर लोगों में मन में अक्सर संशय की स्थिति रहती है। लोग अक्सर ज्योतिषियों से पूछते रहते हैं पंचक में शुभ कार्य करना चाहिए या नहीं। शास्त्र कहते हैं पंचक शुभ कार्य करने में बाधा नहीं बनता है। अर्थात् यदि आप शुभ कार्य करने जा रहे हैं तो पंचक में करने में कोई रुकावट नहीं। कुछ अशुभ कार्यो को पंचक के दौरान नहीं करना चाहिए। पंचक हर माह एक बार आता है।
पंचक है क्या
पंचक दरअसल पांच नक्षत्रों का समूह होता है। हर दिन एक नक्षत्र होता है इसलिए पांच नक्षत्रों के समूह को पंचक कहा जाता है। 27 नक्षत्रों के समूह में अंतिम पांच नक्षत्र दूषित होते हैं जिन्हें पंचक कहा जाता है। ये नक्षत्र हैं धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती। प्रत्येक नक्षत्र के चार चरण होते हैं। पंचक धनिष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण से प्रारंभ होकर रेवती नक्षत्र के अंतिम चरण तक रहता है। शास्त्रीय मान्यता है कि पंचक में यदि किसी की मृत्यु होती है तो उसे मृतक के दाह संस्कार के साथ पांच पुतले बनाकर दाह करना पड़ता है। अन्यथा उसकी पांच बार आवृत्ति होती है।
पंचक में ये कार्य वर्जित हैं
- धनिष्ठा पंचकं त्याज्यं तृणकाष्ठादिसंग्रहे ।
- त्याज्या दक्षिणदिग्यात्रा गृहाणां छादनं तथा ।।
अर्थात् पंचक के दौरान दक्षिण दिशा की ओर यात्रा नहीं करना चाहिए। घर का निर्माण हो रहा है तो पंचक में छत नहीं डालना चाहिए। घास, लकड़ी, कंडे या अन्य प्रकार के ईधन का भंडारण पंचक के समय नहीं किया जाता है। शैय्या निर्माण, पलंग बनवाना, पलंग खरीदना, बिस्तर खरीदना, गद्दे बनवाना, बिस्तर का दान पंचक के दौरान नहीं किया जाता है। शुभ कार्य करने के लिए पंचक देखने की आवश्यकता नहीं है।
वर्ष 2023 में पंचक
- 23 जनवरी दोपहर 1.50 से 27 जनवरी सायं 6.38 तक
- 19 फरवरी रात्रि 1.15 से 23 फरवरी रात्रि 3.43 तक
- 19 मार्च प्रात: 11.16 से 23 मार्च दोपहर 2.09 तक
- 15 अप्रैल सायं 6.44 से 19 अप्रैल रात्रि 11.54 तक
- 12 मई रात्रि 12.16 से 17 मई प्रात: 7.38 तक
- 9 जून प्रात: 6.02 से 13 जून दोपहर 1.33 तक
- 6 जुलाई दोपहर 1.38 से 10 जुलाई सायं 6.58 तक
- 2 अगस्त रात्रि 11.24 से 6 अगस्त रात्रि 1.45 तक
- 30 अगस्त दोपहर 12.19 से 3 सितंबर रात्रि 3.35 तक
- 26 सितंबर रात्रि 8.00 से 30 सितंबर रात्रि 10.47 तक
- 24 अक्टूबर प्रात: 4.23 से 28 अक्टूबर प्रात: 9.24 तक
- 20 नवंबर प्रात: 10.08 से 24 नवंबर सायं 4.00
- 17 दिसंबर दोपहर 3.43 से 21 दिसंबर रात्रि 10.10 तक












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