Nirjala Ekadashi 2025: आज कीजिए ये 5 उपाय, हर संकट हो जाएगा दूर, धन की कभी नही होगी कमी
Nirjala Ekadashi 2025): ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी अर्थात् निर्जला एकादशी आज है। रवियोग में आ रही साल की इस सबसे बड़ी एकादशी के दिन पांच महाउपाय करके आप अपने सारे कष्टों से छुटकारा पा सकते हैं।
निर्जला एकादशी केवल व्रत और पूजा का दिन नहीं है, बल्कि यह अत्यंत प्रभावशाली आध्यात्मिक उपायों, दान, तप और पुण्य अर्जन का श्रेष्ठ अवसर भी है। इस दिन किए गए उपाय जीवन में शुभता, समृद्धि, स्वास्थ्य और मोक्ष तक का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।

नीचे निर्जला एकादशी के कुछ विशेष और लाभकारी उपाय दिए गए हैं...
पहला उपाय (Nirjala Ekadashi 2025)
निर्जला एकादशी के दिन भगवान भगवान विष्णु का पूजन करते समय केवल पीले वस्त्र ही पहनें। पूजा में पीले फूल, तुलसी दल, चंदन, धूप-दीप रखें और शंख ध्वनि अवश्य करें। इस दिन दक्षिणावर्ती शंख में चावल भरकर रखें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। इसके बाद इन चावल को शंख से निकालकर एक पहले कपड़े में बांधकर अपनी धन रखने के स्थान पर रख लें। इससे आपकी आय में वृद्धि होगी, धन का संचय होगा और धन से जुड़े सारे काम सफलतापूर्वक होने लगेंगे।
दूसरा उपाय (Nirjala Ekadashi 2025)
निर्जला एकादशी के दिन व्रती को दान अवश्य करना चाहिए। इस दिन जल का दान विशेष पुण्यदायक माना जाता है। मिट्टी के घड़े में ठंडा जल, पंखा, छाता, जौ, चना, चीनी, गुड़, शर्बत, मौसमी फल आदि दान करें। यह दान ब्राह्मण, तपस्वी या जरूरतमंद व्यक्ति को देना चाहिए। ऐसा दान करने से ग्रहों की पीड़ा दूर होती है।
तीसरा उपाय
निर्जला एकादशी के दिन तुलसी पूजा का विशेष महत्व होता है। इस दिन तुलसी के पौधे में जल डालकर पूजन करें और इसके समीप सुबह और शाम घी का दीपक लगाएं। तुलसी को वस्त्र अर्पित करें। इससे पारिवारिक सुख-सौभाग्य बना रहता है। इस दिन तुलसी का पौधा लगाना चाहिए किंतु पौधा दान नहीं करना चाहिए।
चौथा उपाय (Nirjala Ekadashi 2025)
निर्जला एकादशी का दिन पितरों को प्रसन्न करने का दिन भी होता है। पितृ अतृप्त रहते हैं तो अनेक कष्ट आते हैं। रोग, आर्थिक संकट, परेशानियां, काम में बाधा जैसी स्थिति बनी रहती है। इस दिन पवित्र नदी, तालाब या घर पर ही पितरों के लिए जल तर्पण करें। \"ॐ पितृभ्यो नमः\" का जप करते हुए जल तर्पण करें। इससे पितृदोष से मुक्ति मिलती है। इस दिन पितरों के निमित्त अन्नदान भी किया जाता है।
पांचवां उपाय
निर्जला एकादशी के दिन रोग मुक्ति के लिए भगवान धन्वंतरि की पूजा भी की जाती है। एक कलश लेकर उसमें तुलसी, नीम, पीपल, गूलर, शमी के पौधों की पत्तियां डालकर जल भर दें। \"ॐ श्री धन्वंतरये नमः\" मंत्र का 108 बार जप करें और इस जल से रोगी को स्नान करवाने से सारे ग्रहों की पीड़ा शांत होती है और रोगों से मुक्ति मिलती है।












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