Navratri 2019: लाल-पीली चुनरी से ही क्यों होता है मां दुर्गा का श्रृंगार?

नई दिल्ली। 29 सितंबर, रविवार से शारदीय नवरात्र आरंभ हो जाएंगे। हिंदू धर्म में नवरात्र का बहुत बड़ा महत्व बताया गया है। नौ दिनों तक चलने वाली इस पूजा में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों आराधना की जाती है, साथ ही मां का विशेष रूप से श्रृंगार किया जाता है, यहां तक कि नवरात्रि में केवल मां का श्रृंगार ही मायने नहीं रखता है बल्कि मां की पूजा करने वाले भक्तजनों का भी संजना-संवरना काफी जरूरी है।

क्यों जरूरी है मां का श्रृंगार?

क्यों जरूरी है मां का श्रृंगार?

इलाहाबाद के पंडित स्वामी नाथ शर्मा का कहना है कि मां का श्रृंगार हमलोग इसलिए करते हैं क्योंकि वो पावन हैं, सर्वशक्तिमान और सुंदर हैं, जिनकी छांव में इंसान हर दर्द भूल जाता है, जब बच्चों को ममता की जरूरत बनती हैं तो वो परमप्रिया मां पार्वती बन जाती हैं और जब बच्चों की जान पर बन आती हैं तो वो मां काली का रूप धर लेती हैं, इसलिए भक्तजन खुश होकर अपनी मां को सजाते हैं।

'मां का वास हर भक्त के दिल में होता है'

'मां का वास हर भक्त के दिल में होता है'

पंडित स्वामी नाथ शर्मा ने कहा कि मां का वास हर भक्त के दिल में होता है इसलिए मां की तरह भक्त को भी संजना-संवरना चाहिए क्योंकि इस वजह से को खुश और शांत रहेगा जो कि किसी भी काम को करने के लिए बहुत ज्यादा जरूरी हैं। इसलिए दुर्गासप्तशति और पुराणों में मां के श्रृंगार का वर्णन होता है।

लाल-पीली चुनरी से सजाया जाता है माता को

लाल-पीली चुनरी से सजाया जाता है माता को

माना जाता है कि माता को लाल और पीला रंग बहुत पसंद हैं और वो इन रंग के कपड़ों को पहनती हैं और उन्हें लाल-पीली चुनरी से सजाया जाता है, मां को प्रसन्न करने के लिए हर जातक अपनी हर संभव कोशिश करता है। मालूम हो कि नवरात्र में कई जगहों पर मां को फूलों से तो कई जगह मोतियों और गहनों से सजाया जाता है, यही नहीं कहीं-कहीं तो लोग मां का श्रृंगार करते समय काफी नाचते-गाते भी हैं। मां की भक्ति का यह भी एक मोहक हिस्सा है।

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