Navratri 2017: आखिर क्या है डांडिया डांस और नवरात्रि का कनेक्शन?
नई दिल्ली। शारदीय नवरात्रि आते ही चारों ओर डांडिया डांस की धूम मच जाती है, खूबसूरत पारंपरिक परिधानों में सजे-धजे लोग जब डांडिया करते हैं तो वो समां ही कुछ और होता है। पहले तो ये डांस गुजरात और राजस्थान तक ही सीमित था लेकिन बदलते वक्त ने इस डांस को काफी ग्लैमराइज्ड कर दिया है और इसी वजह से आज के नवयुवकों को भी डांडिया का बेहद इंतजार रहता है।
लेकिन क्या कभी आपने जानने की कोशिश की आखिर डांडिया और नवरात्रि का संबंध क्या है, अगर नहीं तो चलिए आज इसी मुद्दे पर विस्तार से बात करते हैं...
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डांडिया रास का मतलब
- दरअसल डांडिया रास के जरिए देवी और असुर महिषासुर के बीच की नकली लड़ाई का मंचन किया जाता है और इसी वजह से इसे तलवार नृत्य उपनाम है।
- छड़ें यानी कि डांडिया दुर्गा की तलवार का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- महिलाएं मां दुर्गा का रूप धरती हैं और इसी कारण वो पारंपरिक परिधानों में 16 श्रृंगार करती हैं।
- वैसे रास का संबंध श्रीकृष्ण से है और पांरपरिक पूजा के बाद इस डांडिया में पुरूष भी शामिल होते हैं।
- और जब महिला और पुरूष दोनों इस डांस को करते हैं तो वो श्रीकृष्ण की रास लीला को प्रस्तुत करते हैं।
- गरबा और रास के बीच मुख्य अंतर यह है कि गरबा विभिन्न हाथ और पैर आंदोलनों के होते हैं, जबकि रास, (रंगीन सजाया छड़ें की जोड़ी) के साथ खेला जाता है।
- गरबा में लोगों की संख्या पर ऐसी कोई आवश्यकता नहीं है, जबकि डांडिया कदमों से ज्यादातर लोगों की भी संख्या की आवश्यकता होती है।
- अब तो बड़े-बड़े व्यापारिक संगठन और कंपनियां अच्छी खासी कीमत पर डांडिया और गरबा का आयोजन करते हैं।
- लोग ऐसे मौकों में हिस्सा लेने के लिए बड़ी कीमतों पर टिकट लेकर इसमें शामिल भी होते हैं।
- इस तरह से अब तो ये हमारे देश का एक बड़ा आयोजन बनकर सामने आया है।
- जहां गरबा का आयोजन मां की पूजा से पहले किया जाता है, वहीं डांडिया आरती के बाद खेला जाता है।
- ये डांस एकता का मानक है, जिसमें लोग खुशी-खुशी शामिल होते हैं।
- नवरात्रि के त्योहार को सिर्फ अच्छाई की बुराई पर जीत (मां दुर्गा की महिषासुर पर जीत) के रूप में नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति में एकता के प्रतीक के रूप में भी मनाते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि देखा जाए तो भक्त इस त्योहार को सिर्फ मां की पूजा करके ही नहीं मनाते, बल्कि साथ ही साथ पारंपरिक और रंग-बिरंगे कपड़े पहनकर लोक गीत गाकर गरबा और डांडिया भी खेलते हैं।

रास का संबंध श्रीकृष्ण से

डांडिया और गरबा के बीच का अंतर

मार्डन हो गया है डांडिया

एकता का मानक
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