Navami Kab Hai: महानवमी किस दिन है? 10 दिनों की शारदीय नवरात्रि से ना हों कंफ्यूज, देखें सही तारीख
Navami Kab Hai 2025: उत्तर और पश्चिम भारत में शारदीय नवरात्रियों का जोश पूरे जोरों पर है। पिछले छह दिनों से हर जगह मंदिरों में माता रानी के जयकारे गूंज रहे हैं। भक्त अपनी श्रद्धा और भक्ति के साथ व्रत कर रहे हैं। इस बार नवरात्रि का आयोजन खास है क्योंकि यह 9 नहीं बल्कि 10 दिनों की है, जिससे महाअष्टमी, महा नवमी और दशहरे की तारीखों को लेकर लोगों में थोड़ी उलझन भी है।
नवरात्रियों के आखिरी दिनों में कन्या पूजन और देवी की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस आर्टिकल में हम आपको महाअष्टमी और महा नवमी की सही तिथियां, पूजा का समय और कन्या पूजन की पूरी विधि विस्तार से बताएंगे। ताकि आप इस पावन अवसर पर बिना किसी भ्रम के पूरी श्रद्धा के साथ हिस्सा ले सकें।

महाअष्टमी कब मनाई जाएगी?
इस साल महाअष्टमी 30 सितंबर, मंगलवार को है। इस दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है, जिन्हें शांति, पवित्रता और सादगी का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन मां दुर्गा ने चंड, मुंड और रक्तबीज जैसे असुरों का वध किया था।
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महाअष्टमी तिथि का समय
- प्रारम्भ: 29 सितंबर 2025, शाम 4:31 बजे
- समाप्ति: 30 सितंबर 2025, शाम 6:06 बजे
महानवमी कब है?
महानवमी 1 अक्टूबर, बुधवार को मनाई जाएगी। इस दिन मां दुर्गा को महिषासुरमर्दिनी के रूप में पूजा जाता है। यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है।
महा नवमी तिथि का समय
- प्रारम्भ: 30 सितंबर 2025, शाम 6:06 बजे
- समाप्ति: 1 अक्टूबर 2025, शाम 7:01 बजे
कन्या पूजन की विधि
महाअष्टमी और महानवमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व है। घर आई कन्याओं के पैर सबसे पहले धोए जाते हैं और उन्हें साफ आसन पर बैठाया जाता है। फिर उनके माथे पर तिलक लगाया जाता है और हाथ में कलावा बांधा जाता है। इसके बाद उन्हें हलवा, पूरी और चना खिलाया जाता है। पूजा के बाद कन्याओं को गिफ्ट या दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है।
नोट: इस साल शारदीय नवरात्रि 9 नहीं बल्कि 10 दिन की है, इसलिए अष्टमी, नवमी और दशहरे की सही तारीखों को जानना बहुत जरूरी है।
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डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई तिथियां और पूजा संबंधी जानकारी पंचांग, धार्मिक परंपरा और सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार की गई हैं। व्यक्तिगत विश्वास और स्थानीय पूजा समय में भिन्नता हो सकती है। पाठकों से अनुरोध है कि पूजा और व्रत करने से पहले अपने स्थानीय मंदिर या धार्मिक गुरु से सही जानकारी प्राप्त करें। यह लेख केवल जानकारी और मार्गदर्शन के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है।












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