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Matangi Jayanti 2021: कौन हैं मांतगी देवी, जिन्हें लगता है 'जूठन का भोग'?

By पं. ज्ञानेंद्र शास्त्री
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नई दिल्ली, 14 मई। शनिवार यानी कि 15 मई को 'मांतगी जंयती' है। इस दिन मां मातंगी की पूजा की जाती है। मां की पूजा करने से जातक को शक्ति, धन, ज्ञान और लोकप्रियता हासिल होती है। मां के भक्त को कभी कोई कष्ट नहीं होता है, उसका जीवन सुख और खुशहाली से व्यतीत होता है। मालूम हो कि मातंगी मां को वाणी और संगीत की अधिष्ठात्री देवी कहते हैं, जिनके आगे देवतागण भी सिर झुकाते हैं।

Matangi Jayanti 2021: कौन हैं मांतगी देवी, जिन्हें लगता है जूठन का भोग?

मां का ये रूप बेहद ही सरस, वर्ण श्याम, कोमल और सुंदर हैं। मां दया की पर्याय हैं। मुनि मतंग की पुत्री होने के कारण उनका नाम मांतगी पड़ा था। मां ने अपनी भुजाओं में कपाल, वीणा, खड्ग और वेद को धारण किया हुआ है। आपको बता दें कि मांतगी देवी ही सृष्ठी की ऐसी देवी मां हैं, जिन्हें 'जूठन का भोग' लगाया जाता है, जिसके पीछे एक बड़ा कारण है।

आइए जानते हैं क्या है वो कारण

पुराणों में वर्णन हैं कि एक बार भगवान विष्णु अपनी पत्नी लक्ष्मी के साथ कैलाश पर्वत पर भगवान शिव और मां पार्वती से मिलने गए। वहां पर विष्णु जी ने शिव-पार्वती को कुछ खाने को दिया, जिसे कि शिव-पार्वती ने खा तो लिया लेकिन उसका कुछ अंश नीचे धरती पर गिर गया, जिसे कि श्याम वर्ण वाली एक दासी ने खा लिया और उसके बाद उसके गर्भ से मां मांतगी का जन्म हुआ था, इसी वजह से मां मांतगी को जूठन का भोग लगाया जाता है।

मां पार्वती ने धरा मांतगी का रूप

इसके पीछे एक कहानी पार्वती जी की भी है। कहा जाता है कि एक बार भ्रमण के दौरान मां पार्वती एक मलिन बस्ती में पहुंच गई थी, जहां कुछ मलिन महिलाएं भोजन कर रही थीं। वो अपने सामने एकदम से पार्वती जो देखकर हैरान रह गईं, उन्होंने तुरंत अपने-अपने भोजन की थाली मां पार्वती के सामने रख दीं, जिसे देखकर देवतागण गुस्सा हो गए। लेकिन माता पार्वती ने महिलाओं का प्रेम और श्रद्धा देखकर मातंगी का रूप धारण किया और उस जूठन को ग्रहण किया इसलिए मां को जूठा प्रसाद चढ़ता है। माता की जंयती पर मंदिरों में पूजा-पाठ होता है, इस दिन कन्या पूजन भी किया जाता है।

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पूजा विधि

  • सुबह सबसे पहले स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए।
  • इस बाद मां मांतगी की पूजा जूठे फूल, फल, मिठाई से करनी चाहिए।
  • पूजा के दौरान मां आपको नमस्कार है' करते हुए पूजा शुरू करनी चाहिए।
  • व्रतियों को शाम के समय मातंगी व्रत कथा सुननी चाहिए।
  • उसके बाद आरती करनी चाहिए और क्षमायाचना के बाद अपना व्रत खोलना चाहिए।

English summary
Matangi Jayanti is celebrated on the Shukla Paksha Tritiya day of Baisakh month (15th MAY). here is Puja Vidhi, Importance and Katha .
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