Masik Shivratri 2024 Muhurat: मासिक या महाशिवरात्रि, क्या है आज? जानिए पूजा मुहूर्त
Masik Shivratri 2024 Muhurat: आज माघ माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि है, जिसे कि लोग मासिक शिवरात्रि के रूप में पूजते हैं। हालांकि लोगों को थोड़ा इसे लेकर कन्फ्यूजन हो गया है कि कहीं आज महाशिवरात्रि तो नहीं है।

तो आपको बता दें कि आज मासिक शिवरात्रि है और महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को होता है और वो दिन 8 मार्च को है। आज के दिन लोग शिवलिंग पर जल अर्पित करते हैं और उस पर धतुरा, फूल, भांग और बेलपत्र आदि चीजें चढ़ातें हैं।
आपको बता दें कि आज के दिन भोलेनाथ की पूजा करने से इंसान की सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। आज कुछ लोग व्रत भी रखते हैं। अगर आज भगवान शिव के साथ मां पार्वती की भी पूजा की जाए तो इंसान को दोहरे फल की प्राप्ति होती है।
आज कुछ लोग उपवास भी रखते हैं, माना जाता है कि अगर आज के दिन अविवाहित लोग उपवास करें तो उन्हें मनमुताबिक जीवन साथी प्राप्त होता है और अगर विवाहित लोग इस व्रत को करें तो उनका वैवाहिक जीवन सुखमय होता है।
पूजा मुहूर्त
- कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ: आज सुबह 11 बजकर 17 मिनट पर
- कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का अंत: 09 फरवरी 2024 को सुबह 08 बजकर 02 मिनट पर
आप शिव की पूजा इस दौरान किसी भी प्रहर कर सकते हैं, वैसे भगवान शिव को प्रदोष काल काफी प्रिय है इसलिए संभव हो तो प्रदोष काल में ही मासिक शिवरात्रि की पूजा करें। शिव को जल अर्पित करने के बाद उनके लिए विशेष आरती करनी चाहिए, ऐसा करने से इंसान को हर तरह का सुख प्राप्त होता है।
शिव जी की आरती
- ॐ जय शिव ओंकारा,
- स्वामी जय शिव ओंकारा।
- ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव,
- अर्द्धांगी धारा ॥
- ॐ जय शिव ओंकारा...॥
- एकानन चतुरानन
- पंचानन राजे ।
- हंसासन गरूड़ासन
- वृषवाहन साजे ॥
- ॐ जय शिव ओंकारा...॥
- दो भुज चार चतुर्भुज
- दसभुज अति सोहे ।
- त्रिगुण रूप निरखते
- त्रिभुवन जन मोहे ॥
- ॐ जय शिव ओंकारा...॥
- अक्षमाला वनमाला,
- मुण्डमाला धारी ।
- चंदन मृगमद सोहै,
- भाले शशिधारी ॥
- ॐ जय शिव ओंकारा...॥
- श्वेताम्बर पीताम्बर
- बाघम्बर अंगे ।
- सनकादिक गरुणादिक
- भूतादिक संगे ॥
- ॐ जय शिव ओंकारा...॥
- कर के मध्य कमंडल
- चक्र त्रिशूलधारी ।
- सुखकारी दुखहारी
- जगपालन कारी ॥
- ॐ जय शिव ओंकारा...॥
- ब्रह्मा विष्णु सदाशिव
- जानत अविवेका ।
- प्रणवाक्षर में शोभित
- ये तीनों एका ॥
- ॐ जय शिव ओंकारा...॥
- त्रिगुणस्वामी जी की आरति
- जो कोइ नर गावे ।
- कहत शिवानंद स्वामी
- सुख संपति पावे ॥
- ॐ जय शिव ओंकारा...॥
डिसक्लेमर- यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।












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