Mantro Ka Prabhav: धनवान बनने के लिए करते हैं अगर मंत्रों का जाप तो जानिए कितने दिनों में दिखता है प्रभाव
Mantro Ka Prabhav: नवग्रहों की शांति के लिए ज्योतिष शास्त्र में अनेक उपाय बताए गए हैं जिनमें से ग्रहों के शांति मंत्रों का जाप करना सर्वविदित और सटीक तरीका है। जन्मकुंडली में जो ग्रह कमजोर होता है या खराब होता है उसे मजबूत बनाने के लिए उसके मंत्र का जाप करवाया जाता है।
यह जाप व्यक्ति स्वयं भी कर सकता है और पंडित से भी करवाया जा सकता है। किंतु पंडित से करवाएं तो अधिक ठीक रहता है क्योंकि वह विधि विधान से कर सकता है।

कई लोगों का अक्सर यह प्रश्न रहता है कि मंत्र जाप करवाने के कितने दिन बाद हमें राहत मिलने लगेगी। उनके पूछने का मतलब होता है कि मंत्र जाप के कितने दिन बाद उसका प्रभाव होना प्रारंभ हो जाता है तो शास्त्रों में इसका उत्तर भी दिया हुआ है।
मंत्रों का फल मिलने का समय अलग-अलग होता है (Mantro Ka Prabhav)
प्रत्येक ग्रह के मंत्रों का फल मिलने का समय अलग-अलग होता है। प्रत्येक ग्रह का एक राशि में गोचर करने का समय अलग-अलग होता है उसी के अनुसार उसके संपूर्ण काल में फल मिलता है।
सूर्य
- ऊं ह्रां ह्रीं ह्रूं सं: सूर्याय स्वाहा:
- सूर्य के मंत्र का फल प्रथम पांच दिन में मिल जाता है।
चंद्र
- ऊं श्रां श्रीं श्रूं स: चंद्राय स्वाहा:
- चंद्र के मंत्र का फल अंतिम तीन घटी में मिलता है।
मंत्रों का प्रभाव (Mantro Ka Prabhav)
मंगल
- ऊं क्रां क्रीं क्रूं स: भौमाय स्वाहा:
- मंगल के मंत्र का फल प्रथम आठ दिन में मिलता है।
बुध
- ऊं ब्रां ब्रीं ब्रूं स: बुधाय स्वाहा:
- बुध के मंत्र का फल सर्वकाल में अर्थात् कभी भी मिल सकता है।
गुरु
- ऊं ज्ञां ज्ञीं ज्ञूं स: जीवाय स्वाहा:
- गुरु के मंत्र का फल मध्यकाल के दो माह के भीतर मिल जाता है।
शुक्र
- ऊं आं ईं ऊं स: शुक्राय स्वाहा:
- शुक्र के मंत्र का फल मध्य के सात दिन में मिलता है।
शनि
- ऊं खां खीं खूं स: मंदाय स्वाहा:
- शनि के मंत्र का फल अंतिम छह माह में मिलता है।
राहु
- ऊं भ्रां भ्रीं भ्रूं स: राहवे स्वाहा:
- राहु के मंत्र का फल अंतिम दो माह में मिलता है।
केतु
- ऊं क्लां क्लीं क्लूं स: केतवे स्वाहा:
- केतु के मंत्र का फल अंतिम दो माह में मिलता है।












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