Maa Katyayani: नवरात्र के छठे दिन होती है मां कात्यायनी की पूजा, जानिए महत्व और आरती

Maa Katyayani: नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा होती है।देवी का ये रूप भी काफी अलौकिक और सुंदर है। ये शक्ति और विजय की देवी हैं, जो भक्तों को भयमुक्त करती हैं और हर संकट से उबारती हैं। मां अपने हर भक्त से बहुत प्यार करती हैं। जो भी कोई भी मां की पूजा पूरे सच्चे मन से करता है उसे सुख, शांति और समद्धि की प्राप्ति होती है।

क्या है कात्यायनी का मतलब?(Maa Katyayani)

मान्यता है कि महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर देवी दुर्गा ने कात्यायनी के रूप में उनके घर में बेटी के रूप में जन्म लिया था। मां की पूजा करने से हर इंसान रोगमुक्त हो जाता है।

Maa Katyayani

कहते हैं कि जिन कन्याओं के विवाह में देरी हो रही हो, वो अगर मां को लाल पुष्प और शहद अर्पित करें तो उनका लगन जल्दी हो जाता है। आपको बता दें कि मां कात्यायनी को शहद, गुड़ और हलवा विशेष रूप से प्रिय है।

पूजा विधि (Maa Katyayani)

  • प्रातः स्नान कर मां की पूजा का संकल्प लें।
  • मां की प्रतिमा या चित्र को पीले या लाल वस्त्र पर स्थापित करें।
  • उन्हें लाल गुलाब, कमल या गेंदा के फूल चढ़ाएं।
  • मां के समक्ष घी का दीपक जलाएं और धूप अर्पित करें।
  • मां को शहद, गुड़ और पंचामृत का भोग लगाएं।
  • अंत में मां कात्यायनी की आरती करें, प्रसाद बांटे।

मंत्र

  • "या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥"
  • "ॐ कात्यायन्यै च विद्महे कन्याकुमार्यै धीमहि। तन्नो दुर्गिः प्रचोदयात्॥"

आरती

DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी बात को अमल में लाने से पहले किसी पंडित या ज्योतिषी से जरूर बात करें।

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