Kajari or Saturi Teej 2021 : कजरी तीज आज, जानिए महत्व और पूजा विधि
नई दिल्ली, 20 अगस्त। भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को सातुड़ी तीज मनाई जाती है। इसे सातुआ तीज, कज्जली तीज, कजरी तीज और बूढ़ी तीज के नाम से भी जाना जाता है। इस सातुड़ी का पर्व उत्तरप्रदेश में बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। इस बार यह तीज 25 अगस्त 2021 को आ रही है। इस दिन कजरी अर्थात् विरह गीत की प्रतिस्पर्धा भी होती है। लोग नावों पर सवार होकर कजरी गीत गाते हैं। यह वर्षा ऋतु का प्रमुख राग है। ब्रज के मल्हारों की भांति इसे भी प्रमुख वर्षा गीत माना जाता है।

कजरी तीज के दिन महिलाएं मेहंदी आदि लगाकर सोलह श्रृंगार करती हैं और झूला झूलती हैं। घरों में मिष्ठान्न, पकवान बनाए जाते हैं। ग्रामीण अंचलों में इसे तीजा कहते हैं। ग्रामीण बालाएं तथा वधुएं हिंडोले पर बैठकर कजरी गीत गाती हैं।
इसे बूढ़ी तीज भी कहा जाता है। इस दिन महिलाएं व्रत रखकर गायों का पूजन करती हैं। सात गायों के लिए आटे की सात लोई बनाई जाती है और फिर उन्हें गायों को खिलाया जाता है। इसके बाद महिलाएं भोजन करती हैं। वधुएं शक्कर और रुपयों का बायना निकालकर सास या सास के समान किसी स्त्री को देकर उनके चरण स्पर्श का आशीर्वाद लेती हैं।












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