Kaal bhairav ki Aarti: भय मुक्त होने के लिए रोज करें काल भैरव की आरती
Kaal bhairav Aarti Lyrics in Hindi: कालभैरव की पूजा जहां होती है वहां दुख, कष्ट और चिंता का वास नहीं होता है बल्कि उस जगह शांति निवास करती है।

Kaal bhairav ki aarti ki Aarti: जो लोग भय मुक्त और चिंता मुक्त होना चाहते हैं उन्हें रोज कालभैरव की पूजा अर्चना करनी चाहिए। माना जाता है कि काल भैरव प्रभु शंकर के ही अवतार हैं इसलिए इन्हें काशी का कोतवाल भी कहा जाता है। कहते हैं कि काशी विश्ननाथ का दर्शन तब तक अधूरा है, जब तक इंसान काल भैरव का दर्शन नहीं करता है। इनकी पूजा करने से इंसान का भय समाप्त हो जाता है। इंसान हमेशा खुश रहता है और उसे तरक्की और धन की प्राप्ति होती है।
काल भैरव की आरती
- जय भैरव देवा, प्रभु जय भैरव देवा ।
- जय काली और गौर देवी कृत सेवा ॥
- ॥ जय भैरव देवा...॥
- वाहन श्वान विराजत कर त्रिशूल धारी ।
- महिमा अमित तुम्हारी जय जय भयहारी ॥
- ॥ जय भैरव देवा...॥
- तुम बिन देवा सेवा सफल नहीं होवे ।
- चौमुख दीपक दर्शन दुःख खोवे ॥
- ॥ जय भैरव देवा...॥
- तेल चटकी दधि मिश्रित भाषावाली तेरी ।
- कृपा कीजिये भैरव, करिए नहीं देरी ॥
- ॥ जय भैरव देवा...॥
- पाँव घुँघरू बाजत अरु डमरू दम्कावत ।
- बटुकनाथ बन बालक जल मन हरषावत ॥
- ॥ जय भैरव देवा...॥
- बटुकनाथ जी की आरती जो कोई नर गावे ।
- कहे धरनी धर नर मनवांछित फल पावे ॥
- ॥ जय भैरव देवा...॥
काल भैरव की आरती कितने बजे होती है?
काल भैरव की पूजा अलग-अलग स्थानों में अलग तरह से होती है। वैसे इनकी आरती या तो सुबह करें या फिर गोधूली बेला में करने से लाभ होता है।
काल भैरव की आरती कितनी बार करनी चाहिए?
काल भैरव की आरती दिन में दो बार (सुबह-शाम) भी हो सकती है या एक बार ( सुबह ) के वक्त हो सकती है।
काल भैरव की आरती करने के नियम
काल भैरव की आरती करते वक्त आपका मन और तन दोनों स्वच्छ होना चाहिए। आप नहा-धोकर स्वच्छ कपड़े पहनकर काल भैरव की पूजा करें।
काल भैरव की पूजा कब और किस लिए करते हैं?
जो भयमुक्त, चिंता मुक्त, यश, प्रेम और धन की इच्छा रखते है, वो काल भैरव जी की पूजा करते हैं।
काल भैरव और भैरव में क्या अंतर है?
भैरव दो रूप में पूजे जाते हैं- बटुक भैरव तथा काल भैरव। बटुक भैरव अपने भक्तों में सौम्य रूप में लोकप्रिय हैं, वहीं दूसरी ओर काल भैरव को दंडनायक कहते हैं।













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