Maa Vindhyavasini Puja 2024: मां विंध्यवासिनी की पूजा आज, जानिए महत्व
Maa Vindhyavasini Puja 2024: ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी के दिन माता विंध्यवासिनी की पूजा की जाती है। विंध्याचल पर्वत पर निवास करने वाली माता को शिवमहापुराण में माता सती का रूप बताया गया है। देवी भागवत के अनुसार मां विंध्यवासिनी नंदजा देवी का रूप हैं।
शास्त्रीय कथन है कि माता विंध्यवासिनी की पूजा करने से मनुष्य को सभी कार्यों में सफलता और सिद्धि प्राप्त होती है। परिवार में कोई रोग नहीं रहता, आर्थिक संकट दूर होता है और काम तेजी से चलने लगते हैं।

कैसे हुई मां विंध्यवासिनी उत्पत्ति
मार्कंडेय पुराण के अनुसार एक समय मां दुर्गा ने समस्त देवी-देवताओं को बताया कि वे राक्षसों का संहार करने के लिए पृथ्वी पर नंद और यशोदा के घर जन्म लेंगी। तय समय के अनुसार देवी दुर्गा ने पुत्री रूप में नंदबाबा के घर जन्म लिया। उसी दिन मथुरा में कंस के कारागार में कृष्ण का जन्म हुआ।
चूंकि कंस ने यह भविष्यवाणी सुनी थी कि उसकी बहन देवकी की आठवीं संतान उसका काल होगी इसलिए उसने एक-एक कर देवकी की सात संतानों को मार दिया। आठवीं संतान कृष्ण थी इसलिए उसे बचाने के लिए पिता वासुदेव ने उसे नंदबाबा के घर पहुंचा दिया और वहां से उनकी पुत्री को उठाकर ले आए। जब कंस हत्या करने पहुंचा तो कन्या रूपी देवी दुर्गा अपनी असली स्वरूप में प्रकट हो गई और कंस को चेतावनी दी की उसे मारने वाला सुरक्षित है। तभी से देवी दुर्गा विंध्याचल पर्वत पर निवास करती हैं जिन्हें विंध्यवासिनी कहा जाता है।
कैसे करें मां विंध्यवासिनी की पूजा
माता विंध्यवासिनी की पूजा रात्रि में की जाती है। 12 जून को रात्रि में स्नान करके शुद्ध सूती वस्त्र धारण करें। अपने पूजा स्थान में पूर्व की ओर मुख करके बैठें। एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर इस पर विंध्यवासिनी की मूर्ति या तस्वीर रखें साथ ही मां विंध्यवासिनी का यंत्र भी रखें।
पूजा की सात सुपारी रखें और सात दीपक लगाएं
यंत्र के सामने पान के पत्ते पर पूजा की सात सुपारी रखें और सात दीपक लगाएं। धूप बत्ती लगाएं। यंत्र का पूजन कर उस पर चारों ओर से रक्षा सूत्र लपेटें। मां विंध्यवासिनी स्तोत्र का पाठ करें। नैवेद्य लगाएं, आरती करें। प्रसाद बांटें।












Click it and Unblock the Notifications