Jitiya Vrat Aarti: जितिया व्रत पर करें ये आरती, होगी हर इच्छा पूरी
Jitiya Vrat Aarti Lyrics In Hindi: जितिया व्रत माताएं बच्चे की तरक्की और लंबी उम्र के लिए रखती हैं। ये बेहद कठिन उपवास है। इस बार ये व्रत 6 अक्टूबर को आ रहा है। यहां हम आपके लिए लाए हैं जितिया व्रत की आरती। आपको बता दें कि इस दिन महिलाएं जीमूतवाहन की पूजा-अर्चना करती है।

जितिया व्रत की आरती
- ओम जय कश्यप नन्दन, प्रभु जय अदिति नन्दन।
- त्रिभुवन तिमिर निकंदन, भक्त हृदय चन्दन॥
- ओम जय कश्यप..
- सप्त अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी।
- दु:खहारी, सुखकारी, मानस मलहारी॥
- ओम जय कश्यप..
- सुर मुनि भूसुर वन्दित, विमल विभवशाली।
- अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥
- ओम जय कश्यप..
- सकल सुकर्म प्रसविता, सविता शुभकारी।
- विश्व विलोचन मोचन, भव-बंधन भारी॥
- ओम जय कश्यप..
- कमल समूह विकासक, नाशक त्रय तापा।
- सेवत सहज हरत अति, मनसिज संतापा॥
- ओम जय कश्यप..
- नेत्र व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा हारी।
- वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥
- ओम जय कश्यप..
जितिया व्रत की आरती कितने बजे होती है?
जितिया व्रत की आरती सुबह-शाम तीन दिन करनी होती है।
जितिया व्रत की आरती कितनी बार करनी चाहिए?
जितिया व्रत की आरती दिन में दो बार होनी चाहिए।
जितिया व्रत की आरती के नियम
जितिया व्रत की आरती करते वक्त आपका मन और तन दोनों स्वच्छ होना चाहिए। आप नहा-धोकर स्वच्छ कपड़े पहनकर आरती करें।
जितिया व्रत की आरती किस लिए करते हैं?
बच्चे की यश, शांति और तरक्की के लिए ये आरती की जाती है।
मंत्र
- कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
- सदा बसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि।।
गणेश जी के मंत्र
- ॥ ॐ गं गणपतये सर्व कार्य सिद्धि कुरु कुरु स्वाहा ॥
- गजाननाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।।
- श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा॥
- महाकर्णाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।।
- गजाननाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।।
- ॐ ग्लौम गौरी पुत्र, वक्रतुंड, गणपति गुरु गणेश।
- ग्लौम गणपति, ऋद्धि पति, सिद्धि पति. करो दूर क्लेश ।।
- 'ॐ वक्रतुण्डैक दंष्ट्राय क्लीं ह्रीं श्रीं गं गणपते वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा'









Click it and Unblock the Notifications