Janmashtami 2022: जन्माष्टमी पर है अति दुलर्भ योग, इन चार राशियों के लिए है शुभ, पढ़ें मंत्र और आरती

नई दिल्ली, 19 अगस्त। इस बार जन्माष्टमी का पर्व दो दिन मनाया गया है। कुछ लोगों ने गुरुवार को व्रत रखा था तो कुछ लोग आज उपवास रखें हुए हैं। इस बार ये पर्व विशेष संयोग में आया है, जिसका फायदा वृषभ राशि, कर्क राशि, सिंह राशि और तुला राशि को मिलने वाला है। इन राशियों पर कृष्ण की विशेष कृपा रहने वाली है। इन चार राशियों को धन का विशेष लाभ मिलेगा। वैसे कान्हा जी तो अपने हर भक्त का विशेष ख्याल रखते हैं इसलिए ये दिन सभी राशियों के लिए खुशखबरी लेकर आया है।

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    जन्माष्टमी पर है अतिदुलर्भ योग, इन 4 राशियों के लिए है शुभ

    वैसे जन्माष्टमी के दिन कृष्ण की पूजा विशेष रूप से करने से इंसान को धनलाभ मिलता है। आइए जानते हैं उनके बारे में..

    • कृष्ण की पूजा में पान का पत्ता शामिल करें और पूजा के बाद आप उसे पर्स या तिजोरी में रख दे, आपको हमेशा आर्थिक लाभ मिलेगा।
    • कृष्ण की पूजा में गौ माता या बछड़े की फोटो शामिल करने से इंसान के घर में हमेशा संतान सुख बना रहता है।
    • नौकरी में पदोन्नति अगर चाहिए तो कृष्ण को सफेद मिठाई या खीर अर्पित करें।
    जन्माष्टमी पर है अतिदुलर्भ योग, इन 4 राशियों के लिए है शुभ

    जन्माष्टमी के दिन कृष्ण की पूजा इन मंत्रों से करनी चाहिए

    • श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे,
    • हे नाथ नारायण वासुदेव।।
    • कृं कृष्णाय नम:।
    • ऊं श्रीं नम: श्रीकृष्णाय परिपूर्णतमाय स्वाहा।
    • गोवल्लभाय स्वाहा ।
    • गोकुल नाथाय नम: ।
    • क्लीं ग्लौं क्लीं श्यामलांगाय नम:।
    • ऐं क्लीं कृष्णाय ह्रीं गोविंदाय श्रीं गोपीजनवल्लभाय स्वाहा ह्र्सो।
    • ऊं नमो भगवते श्रीगोविन्दाय।
    जन्माष्टमी पर है अतिदुलर्भ योग, इन 4 राशियों के लिए है शुभ

    भगवान श्रीकृष्ण की आरती

    • आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की,
    • आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।
    • गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला,
    • श्रवण में कुंडल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला।
    • गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली,
    • लटन में ठाढ़े बनमाली भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक।
    • चंद्र सी झलक, ललित छवि श्यामा प्यारी की,
    • श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की, आरती कुंजबिहारी की।
    • कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं,
    • गगन सों सुमन रासि बरसै, बजे मुरचंग।
    • मधुर मिरदंग ग्वालिन संग, अतुल रति गोप कुमारी की,
    • श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की, आरती कुंजबिहारी की।
    • जहां ते प्रकट भई गंगा, सकल मन हारिणि श्री गंगा,
    • स्मरन ते होत मोह भंगा, बसी शिव सीस।
    • जटा के बीच, हरै अघ कीच, चरन छवि श्रीबनवारी की,
    • श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की, आरती कुंजबिहारी की।
    • चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू,
    • चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू।
    • हंसत मृदु मंद, चांदनी चंद,
    • कटत भव फंद, टेर सुन दीन दुखारी की।
    • श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की, आरती कुंजबिहारी की।
    • श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की, आरती कुंजबिहारी की।।

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