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Holika Dahan 2024 Katha and Do-Donts: क्यों करते हैं होलिका दहन? जानिए कथा और क्या करें और क्या ना करें

Holika Dahan 2024 Katha and Do-Donts: आज होलिका दहन है, हालांकि भद्रा का साया होने के कारण आज होलिका दहन का मुहूर्त रात 11 बजकर 14 मिनट के बाद ही है। फाल्गुन माह की पूर्णिमा के दिन होली का पर्व मनाया जाता है। परंपरा के अनुसार आज के दिन पहले होलिका दहन करके पूजा करते हैं और फिर अगले दिन रंगों की होली खेली जाती है।

Holika Dahan 2024 Katha and Do-Donts

आज का दिन बेहद पावन है लेकिन इस दिन हर किसी को कुछ बातों का ख्याल रखना चाहिए, अक्सर लोग छोटी-छोटी बातों को इग्नोर कर देते हैं और उसकी वजह से उन्हें पूजा का उतना फल नहीं मिल पाता है, जितना कि मिलना चाहिए।

इसलिए यहां हम आपको बताते हैं कि होलिका दहन के दिन आपको क्या करना चाहिए क्या नहीं करना चाहिए और साथ ही आपको इस पावन पर्व की कथा के बारे में भी बताएंगे।

होलिका दहन की पूजा सामग्री (Puja Samagri)

  • सूखी लकड़ी,
  • अक्षत,
  • घी,
  • रोली,
  • कच्चा सूत,
  • गुड़,
  • साबुत हल्दी,
  • मूंग,
  • गुलाल,
  • नारियल,
  • गेंहू की बालियां और गाय के गोबर से बनी माला
  • जल।

क्या करें? ( Do-Donts on Holika Dahan Puja)

  • नहा-धोकर स्वच्छ कपड़े पहनें
  • पूजन सामग्री को एक थाली में रखें।
  • भगवान गणेश , मां दुर्गा, हनुमान जी , भगवान नरसिंह, गिरिराज भगवान और राधा-राधी का ध्यान करें।
  • लकड़ी के ऊपर सारी पूजा सामग्री अर्पित करें।
  • फिर घी चढ़ाकर अग्नि जलाएं और फिर परिवार संग उसकी परिक्रमा करें।
  • होलिका अग्नि को जल अर्पित करें ।
  • आरती करें और अग्नि को प्रणाम करें।

क्या ना करें? ( Do-Donts on Holika Dahan Puja)

  • होलिका दहन के वक्त सोना नहीं चाहिए।
  • लड़ाई-झगड़ा ना करें।
  • होलिका दहन के वक्त श्‍मशान पर बिल्कुल ना जाएं।
  • पति-पत्‍नी को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
  • मांसाहारी और मदिरा पान से बचना चाहिए।

होलिका दहन की कथा ( Holika Dahan Katha)

होलिका दहन से जुड़ी सबसे लोकप्रिय कहानी है भक्त प्रहलाद और होलिका की, विष्णु पुराण के अनुसार प्रहलाद बहुत बड़े विष्णु भक्त थे और हर वक्त नारायण का ध्यान और जाप करते रहते थे लेकिन ये बात उनके दैत्य पिता हिरण्यकश्यप को पसंद नहीं थी।

वह न तो पृथ्वी पर मरेगा ना ही आकाश में...

दैत्यराज हिरण्यकश्यप के पास वरदान था कि वह न तो पृथ्वी पर मरेगा ना ही आकाश में, न दिन में मरेगा न रात में, न घर में मरेगा न बाहर, न अस्त्र से मरेगा न शस्त्र से, न मानव से मारेगा न पशु से। जिसकी वजह से वो खुद को ईश्वर समझने लगा था और घमंड में वो इस कदर डूब गया था कि वो अपने बेटे प्रहलाद को ही यातनाएं देने लग गया था।

वो बार-बार प्रहलाद से कहता था कि वो नारायण की पूजा ना करें लेकिन जब उसके बेटे ने उनकी बात नहीं सुनी तो उसने एक दिन गुस्से में आकर अपनी बहन होलिका, जिसे कि आग में ना जलने का वरादन प्राप्त था, से कहा कि वो प्रहलाद को लेकर अग्नि में प्रवेश कर जाए जिससे प्रहलाद जलकर मर जाए।

प्रहलाद सुरक्षित आग से निकल आया, होलिका जल गई

लेकिन हुआ उसका उल्टा ही, होलिका जल गई और प्रहलाद सुरक्षित आग से निकल आया क्योंकि होलिका ने अपने वरदान का गलत प्रयोग करने की सोची इसलिए उसके वरदान का असर खत्म हो गया और इसके बाद ही भगवान विष्णु ने नरसिंह रूप धारण करके हिरण्यकश्यप को गोदूली बेला में वध किया था। इसी इस घटना की याद में लोग होलिका जलाते हैं और उसके अंत की खुशी में होली का पर्व मनाते हैं।

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