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Must Click: बाबा बर्फानी की अनोखी कथा

हिन्दू धर्म में अमरनाथ की यात्रा को सबसे उच्चतम स्थान माना गया है; ये सभी ज्योतिर्लिंगों से भी उपर माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस गुफा में भगवान शंकर ने माता पार्वती को अमरत्व और सृष्टि के सृजन के बारे में बताया था।

बाबा अमरनाथ धाम की यात्रा- पूर्ण विवरण

History of Amarnath Caves or Baba Barfani in Hindi

दरअसल, पार्वती लगातार अपने पति से अमरत्व और सृष्टि के निर्माण का राज जानना चाहती थीं। लेकिन भगवान शंकर उस स्थान की तलाश में थे, जहां कोई तीसरा व्यक्ति सुन न सके। इसलिए उन्होंने इस गुफा को चुना। लेकिन एक कबूतरों का जोड़ा वहां रह गया जिसने ये कथा सुनी।

यह है पूरी कथा

पुराणों में ऐसी कथा है की एक बार पार्वती जी ने महादेव से पूछा कि ऐसा क्यों होता है आप अजर अमर हैं लेकिन मुझे हर जन्म में नया जन्म लेकर आपको प्राप्त करने के लिए तपस्या करनी पडती है। जब मुझे आपको पाना है तो मेरी इतनी कठोर परीक्षा क्यों? उन्होंने शिव जी से उनके गले में पड़ी मुंड माला का रहस्य भी पूछा। पहले तो शिव जी ने उन्हें यह बताना जरूरी नही समझा पर बाद में पत्नी हठ के आगे उनकी एक भी न चली।

अमरत्व की कथा सुनाई भगवान ने

शिव जी ने माता पार्वती से कहा की वे उन्हें किसी एकांत गुफा में यह रहस्य बताएँगे ताकि उसे कोई न सुन सके; क्यूंकि यदि किसी ने यह कथा सुन ली तो वह अमर हो जाएगा इसलिए वे पार्वती जी को लेकर एकांत गुफा में गये।

त्याग दिए अपने सभी चिन्ह

सबसे पहले उन्होंने नंदी जी को पहलगाम में छोड़ा। इसीलिए पहलगाम को यात्रा का शुरुआती पड़ाव कहा जाता है। फिर उन्होंने चन्द्रमा को चन्दनबाड़ी में छोड़ा। गंगा जी को पंचतरणी में कंठी सर्पों को शेषनाग पर त्यागा।

महागुण का पर्वत

आगे बढ़कर गणेश टॉप पर उन्होंने गणेश जी को छोड़ दिया जिसे महागुण का पर्वत भी कहते है। पिस्सू घाटी में पिस्सू नामक कीड़े का त्याग किया। इस प्रकार महादेव ने पंचतत्वों को भी त्याग कर पार्वती जी को लेकर अकेले गुफा में गये।

शिव जी ने गुफा के आसपास अग्नि जला दी

इस कथा को कोई न सुने इसलिए शिव जी ने गुफा के आसपास अग्नि जला दी और देवी जी को कथा सुनाना शुरू किया। कथा सुनते सुनते देवी जी को नींद आ गयी। इस बीच यह कथा कबूतर का जोड़ा सुन रहा था और बीच में गू गू की आवाज़ निकाल रहा था| महादेव ने समझा की देवी कथा को सुन रही है पर कथा कबूतर के जोड़े ने सुनी और वे अमर हो गये।

पार्वती जी सो रही हैं और कबूतरों ने उस कथा को सुन लिया

कथा समाप्त होने पर महादेव ने देखा की पार्वती जी सो रही हैं और कबूतरों ने उस कथा को सुन लिया। वे क्रोधित हो गये और उन्होंने उस जोड़े को मारने का मन बना लिया। इसपर उन दोनों ने महादेव से प्रार्थना की कि यदि वे उनको मार देंगे तो उनकी अमरत्व की कथा मिथ्या हो जाएगी। इस पर शिव जी उन्हें आशीर्वाद दिया की वे सदैव उसी गुफा में निवास करेंगे। आज भी ये जोड़ा उस गुफा में निवास करता है लेकिन इनके दर्शन बड़े दुर्लभ हैं।

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गुफा तक सबसे पहले कौन पहुंचा होगा

हिमालय की दुर्गम पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्थित इस पवित्र गुफा की यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों के मन में यह सवाल उठता है कि इतनी ऊंचाई पर स्थित इस गुफा के स्थान तक सबसे पहले कौन पहुंचा होगा या इस गुफा में भगवान शिव के इस रूप में दर्शन किसने किए होंगे। इस प्रश्न का उत्तर पुराण और लोक मान्यताओं में मिलता है।

भृगु ऋषि ने सबसे पहले शिवलिंगम के दर्शन किये

कहते भृगु ऋषि ने सबसे पहले शिवलिंगम के दर्शन किये थे। इन सबसे अलग इस गुफा के बारे में यह भी कहा जाता है कि इसकी खोज एक कश्मीरी मुसलमान ने की थी। इसका नाम था बूटा मलिक। मलिक भेड़ चराने का काम करता था। इसके परिवार के लोग आज भी अमरनाथ गुफा की देखभाल करते हैं।

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