जय गणेश..जय गणेश..जय गणेश देवा..
विकिपीडिया की माने तो शिवपुराण में कहा गया है कि मां पार्वती ने स्नान करने से पहले अपनी मैल से एक बालक को उत्पन्न करके उसे अपना द्वारपाल बना दिया था और कहा था किसी को भी घर के अंदर प्रवेश नहीं करने देना, जब तक कि वो स्नान करके वापस नहीं आ जातीं। शिवजी ने जब प्रवेश करना चाहा तब बालक ने उन्हें भी रोक दिया। इस पर शिवगणों ने बालक से भयंकर युद्ध किया परंतु संग्राम में उसे कोई पराजित नहीं कर सका।
जिससे भगवान शंकर ने क्रोधित होकर अपने त्रिशूल से उस बालक का सर काट दिया। इससे मां पार्वती नाराज हो उठीं और उन्होंने प्रलय करने की ठान ली। भयभीत देवताओं ने देवर्षि नारद की सलाह पर जगदम्बा की स्तुति करके उन्हें शांत किया। शिवजी के निर्देश पर विष्णु जी उत्तर दिशा में सबसे पहले मिले जीव (हाथी) का सिर काटकर ले आए। मृत्युंजय रुद्र ने गज के उस मस्तक को बालक के धड़ पर रखकर उसे पुनर्जीवित कर दिया। माता पार्वती ने उस गजमुखबालक को अपने हृदय से लगा लिया और देवताओं में अग्रणी होने का आशीर्वाद दिया।
गणेश चतुर्थी के लिए कई शहरों में सुरक्षा बढ़ा दी गयी है। बैंगलोर में भी सुरक्षा के इंतजाम किये गये हैं। लोगों के आवाजही के लिए भी पूरे प्रबंध हैं। अगर आप में से भी कोई आज से लंबोदर जी की पूजा करता है तो उसके समस्त मनोकामनाएं पूरी होंगी और उस पर आने वाला संकट टल जायेगा। आप की सारी मनोकामनाएं पूरी हों और आप तरक्की के रास्ते पर चलें इस बात की कामना वनइंडिया परिवार भी करता है। चलिए सब एक साथ मिलकर बोलें गणपति बाबा मोरिया...













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