Guru Pradosh Vrat 2023: गुरु प्रदोष व्रत आज, जानिए पूजा मुहूर्त, विधि और महत्व
जो महिलाएं प्रदोष की पूजा करती हैं वो अखंड सौभाग्वती रहती हैं और उनकी गोद कभी भी सूनी भी नहीं होती है। प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल में होती है।

Guru Pradosh Vrat 2023: आज शिव-शंभू का दिन यानी कि गुरु प्रदोष व्रत है, गुरुवार को जब प्रदोष व्रत आता है तो उसे गुरु प्रदोष व्रत के नाम से संबोधित किया जाता है। आपको बता दें कि प्रदोष भोलेनाथ के प्रिय उपवास में से एक है, इस दिन का व्रत और पूजा इंसान को सुख-शांति और समृद्धि तो दिलाता ही है, साथ ही इंसान मानसिक कष्ट और शारीरिक व्याधियों से भी मुक्त हो जाता है। वैसे तो आज लोग शिवशंकर की पूजा करते हैं लेकिन आज के दिन अगर लोग शिव और पार्वती जी का साथ में पूजा करे तो उसे मनचाहा साथी मिलता है और अगर वो पहले से शादीशुदा है तो उसका दांपत्य जीवन सुखमय हो जाता है। जो महिलाएं प्रदोष की पूजा करती हैं वो अखंड सौभाग्वती रहती हैं और उनकी गोद कभी भी सूनी नहीं होती है।
पूजा मुहूर्त
- गुरु प्रदोष व्रत का आरंभ: 02 फरवरी 2023, सायं 04:25 मिनट से
- गुरु प्रदोष व्रत समाप्त:03 फरवरी सायं 06: 58 मिनट पर होगा
प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल में ही करनी चाहिए ऐसा करने से इंसान को दोगुने फल की प्राप्ति होती है।
पूजाविधि
- सबसे पहले सुबह स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनें।
- फिर शिव का ध्यान करके व्रत का संकल्प लें।
- फिर भगवान शिव के सामने दीपकजलाएं और पूजा करें।
- शाम को शिवलिंग पर जल और दूध चढ़ाएं।
- भगवान भोलेनाथ को अक्षत, बेलपत्र, भांग, धतूरा, शमी का पत्ता, सफेद फूल, शहद, भस्म, शक्कर आदि अर्पित करें।
- शिवमंत्रों का जाप करें, आरती करें, प्रसाद बांटे और सुख-शांति की प्रार्थना करें।
पूजा के दौरान इन शिवमंत्रों का जाप जरूर करें
- ॐ नम: शिवाय।।
- श्री शंकराय नम:।।
- ।। श्री महेश्वराय नम:।।
- ।। श्री सांबसदाशिवाय नम:।।
- ।। श्री रुद्राय नम:।।
- ।। ओम पार्वतीपतये नम:।।
- ।। ओम नमो नीलकण्ठाय नम:।।
- ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान्मृ त्योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ।।
- विशुद्धज्ञानदेहाय त्रिवेदीदिव्यचक्षुषे।
- श्रेय:प्राप्तिनिमित्ताय नम: सोमाद्र्धधारिणे।।
- प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं, अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशं।
- त्रय: शूलनिर्मूलनं शूलपाणिं, भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यम्।।
- शम्भवाय च मयोभवाय च नमः शंकराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च।।
ईशानः सर्वविध्यानामीश्वरः सर्वभूतानां ब्रम्हाधिपतिमहिर्बम्हणोधपतिर्बम्हा शिवो मे अस्तु सदाशिवोम।।












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