देखिए, ये है ऐतिहासिक भीमचूल्हा, मान्यता- यहां 10 हजार हाथियों जितने बलशाली भीम पकाते थे भोजन

पलामू। झारखंड में मोहम्मदगंज पंचायत के दक्षिणवर्ती सीमा पर स्थित एक ऐतिहासिक धरोहर है भीमचूल्हा। यह जगह पर्यटन के ​लिहाज से भी बड़ी महत्वपूर्ण है। आज कोयल नदी के तट पर इस जगह की खूबसूरती देखते ही बन रही है। क्योंकि, भीमचूल्हा पार्क निर्माण के साथ इस स्थल का बारिश के दिनों में सौंदर्यीकरण हो गया है। आइए जानिए, देखिए और घूमिए..

भीमचूल्हा का महाभारत-काल से संबंध

भीमचूल्हा का महाभारत-काल से संबंध

इस जगह का संबंध महाभारतकाल से है। सरकार की वेबसाइट https://palamu.nic.in/ पर इस बारे में जानकारी दी गई है। जिस पर बताया गया है कि झारखंड प्रांत का जंगलों-पहाड़ों से घिरा पलामू क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक-पौराणिक स्थलों से परिपूर्ण है। यहां भीमचूल्हा है, जो लगभग 5 हजार साल पुराना है। मान्यता है कि, पांडव अपने वनवास के समय इस स्थान पर आए थे। भीम ने यहां खाना पकाया था। कोयल नदी के तट पर शिलाखंडों से बना यह चूल्हा पांडवों के इस इलाके में ठहराव का मूक गवाह माना जाता है। यह चूल्हा वर्तमान के मोहम्मदगंज बैराज के पास देखा जा सकता है।

भीमसेन में 10 हजार हाथियों का बल था

भीमसेन में 10 हजार हाथियों का बल था

महाभारत का काल सनातम धर्म के ग्रंथों में बताए गए द्वापर युग से जुड़ा है। उस काल में ऐसे बहुत से योद्धा थे, जिनमें अपार शारीरिक बल था। कुंती पुत्र भीम उन्ही वीरों में से एक थे। वह पांच भाई थे। राजा पांडु की संतान होने के कारण वे पांडव कहलाए। भीम का जन्म वायु देवता के अंश से हुआ। इसलिए उन्हें हनुमानजी का भाई माना गया। भीम में 10 हजार हाथियों का बल था। उनके शरीर की त्वचा इतनी कठोर थी कि एक से एक विषैले सांप भी उन्हें डंस नहीं पाते थे।

आज भी मिलते हैं प्रमाण

आज भी मिलते हैं प्रमाण

इस संदर्भ में एक पाठ है कि, भीम नागलोक पहुंच गए थे। जहां नागराज वासुकि ने उन्हें दिव्य रस वाले कुंडों का पान कराया था। जिसके बाद भीम का बल बहुत बढ़ गया था। ग्रंथ में इसका उल्लेख है। अब इस युग में भी भीम के नाम पर कई स्थान और ऐतिहासिक प्रमाण मिलते हैं। झारखंड का भीमचूल्हा ऐसा ही एक स्थान बताया जाता है।

देखने लायक है दृश्य

देखने लायक है दृश्य

झारंखड सरकार के पोर्टल के मुताबिक, भीमचूल्हा को और ज्यादा आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। सैलानी यहां का भ्रमण कर आनंदित होते हैं। यहां पहाड़ी के पास पत्थर पर हाथी की आकृति भी दर्शनीय है जिसकी लोग अपने श्रद्धा के अनुसार पूजा-पाठ करते हैं।

कैसे पहुंच सकते हैं यहां?

कैसे पहुंच सकते हैं यहां?

बरवाडी से डेहरी भारतीय रेल लाइन भी भीम चूल्हा के नीचे से होकर गुजरती है। यदि आप यहां आना चाहते हैं तो डाल्टनगंज बाय रोड और रेल से भी जा सकते हैं। मोहम्मदगंज रेलवे स्टेशन पास में है। नजदीकी हवाई अड्डा रांची हवाई अड्डा है, जो यहाँ से 258 किमी की दूरी पर है।

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