Dhanteras Shankh Puja: क्यों शंख कहलाते हैं मां लक्ष्मी के भाई? क्या है मंत्र, महत्व और पूजा विधि?
Dakshinavarti Shankh Pooja : दिवाली के पर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है। इस दिन लोग कुबेर भगवान, मां लक्ष्मी और धन्वंतरी की पूजा करते हैं। दिवाली अपने साथ रोशनी, सुख, शांति और खुशियां लेकर आती है। कहते हैं कि धनतेरस से लेकर भाईदूज तक अगर आप दक्षिणावर्ती शंख की पूजा करें तो मां लक्ष्मी बहुत प्रसन्न होती हैं और व्यक्ति को डबल आशीष देती हैं। मां लक्ष्मी को वैसे भी दक्षिणावर्त शंख बहुत ज्यादा पसंद है इसलिए अगर दिवाली के पांचों दिनों में मां लक्ष्मी के प्रिय शंख की पूजा हो तो घर से कभी भी सुख-शांति की विदाई नहीं होती हैं।

क्यों पसंद है मां लक्ष्मी को शंख?
दरअसल समुंद्र मंथन में मां लक्ष्मी के साथ दक्षिणावर्ती शंख भी निकले थे इसी वजह से इन्हें मां लक्ष्मी का भाई कहा जाता है। ये मां लक्ष्मी को बहुत प्रिय है, इसी कारण कहा जाता है कि अगर लक्ष्मी माता के साथ-साथ शंख की भी पूजा हो तो मां काफी खुश होती हैं। लक्ष्मी जी के साथ शंख अक्सर रहते हैं। ऐसा माना जाता है कि शंख की ध्वनि के बिना हर पूजा अधूरी होती है। इसी वजह से जब भी कोई पूजा होती है तो पंडित जी कथा के बीच में और बाद में शंख जरूर बजाते हैं।
शंख पूजा की सामग्री
दक्षिणावर्ती शंख, सिंदूर, गंगाजल, लाल रंग के वस्त्र, घी का दीपक, केसर,अगरबत्ती, फूल, फल और अक्षत के लिए चावल।

पूजा विधि
- सबसे पहले नहा-धोकर आप स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- फिर एक सफेद चौकी पर लाल रंग का वस्त्र फैलाएं और उस पर शंख रखें।
- फिर उस पर गंगाजल छिड़कें।
- उस पर सिंदूर से टीका करें ,अक्षत, फूल और फल चढ़ाएं।
- अगरबत्ती दिखाएं और फिर आरती करें।
- शंख के मुख पर केसर से श्रीं लिखें।

इन मंत्रों से करें शंख की पूजा
- त्वं पुरा सागरोत्पन्न विष्णुना विधृत: करे।
- निर्मित: सर्वदेवैश्च पाञ्चजन्य नमोऽस्तु ते।
- तव नादेन जीमूता वित्रसन्ति सुरासुरा:।
- शशांकायुतदीप्ताभ पाञ्चजन्य नमोऽस्तु ते॥
- मंत्रः ऊं ह्रीं ह्रीं ह्रीं महालक्ष्मी धनदा लक्ष्मी कुबेराय मम गृह स्थिरो ह्रीं ऊं नमः।
पूजा करने के बाद शंख को लाल रंग के वस्त्र में ही लपेटकर सुरक्षित जगह पर रखें और मां लक्ष्मी का ध्यान करें। मां लक्ष्मी की कृपा हमेशा आप और आपके परिवार पर बरसती रहेगी।












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