Chitragupta 2022 Puja Vidhi: चित्रगुप्त देव पूजा आज, जानिए पूजा सामग्री और विधि
Chitragupta Puja Vidhi: दिवाली के पर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है और इसका अंत भाई-बहन के प्रेम के पर्व भाई-दूज से होता है। आज भाई-दूज यानी कि भईया-दूज का पर्व है। बहुत जगह लोगों ने कल ही ये पर्व मना लिया लेकिन जो लोग उदिया तिथि को मानते हैं, वो आज ये त्योहार मना रहे हैं। आज इस पर्व के साथ ही कायस्थ परिवार चित्रगुप्त देव की भी पूजा करता है। आज के दिन ये लोग कलम-दवात की पूजा करते हैं और जिन बच्चों को पहली बार लिखना होता है, उन्हें आज के ही दिन लोग स्लेट और चॉक पकड़ाते हैं इसलिए कायस्थ परिवार के लिए कार्तिक शुक्ल की द्वितीया तिथि काफी मायने रखती है।

चित्रगुप्त पूजा मुहूर्त 2022 की पूजा का समय
हालांकि कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि का प्रारंभ तो कल दोपहर 03 बजकर 35 मिनट से ही हो गया था लेकिन आज दिन में 02 बजकर 12 मिनट समाप्त होगी। इस दौरान आप कभी भी चित्रगुप्त देव की पूजा कर सकते हैं।
मंत्र
- ॐ श्री चित्रगुप्ताय नमः।
- मसिभाजनसंयुक्तं ध्यायेत्तं च महाबलम्।
- लेखिनीपट्टिकाहस्तं चित्रगुप्तं नमाम्यहम्।।
पूजा सामग्री
चित्रगुप्त देव की तस्वीर, चौकी, अक्षत, टीका, फूल, फल, मिठाई, दीपक, कॉपी या स्लेट या बही खाता, पेन या चॉक या दवात।
पूजा विधि
सबसे पहले नहाधोकर स्वच्छ कपड़े पहनें। चौकी पर चित्रगुप्त देव की तस्वीर रखें। उस पर अक्षत, टीका, फूल, फल, मिठाई चढ़ाएं। फिर उनका ध्यान करते हुए उनसे सुख-शांति की प्रार्खना करें। कॉपी या स्लेट या बही खाते को माथे लगाते हुए पेन या चॉक या दवात से 5 बार 'ॐ श्री चित्रगुप्ताय नमः' लिखें। आरती करें, फिर प्रसाद लोगों में बांटें।
कौन थे चित्रगुप्त?
पुराणों के मुताबिक चित्रगुप्त ब्रह्मदेव के 17वें पुत्र थे। उन्हें लोगों का पाप-पुण्य का लेखा-जोखा रखने वाला, लेखापाल या एकाउंटेंट बताया गए हैं। उनके बारे में कहा जाता है कि यमराज भी चित्रगुप्त के दिए आंकड़ों के ही हिसाब से आदमी के स्वर्ग या नरक का निर्धारण करते हैं। हालांकि चित्रगुप्त भगवान ब्रह्मा के मानस पुत्र कहलाते हैं लेकिन वो कायस्थ परिवार के इष्टदेव बताए गए हैं।












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