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Chandra Grahan: सूतक काल में भी नहीं बंद होते कपाट, महाकाल सहित इन मंदिरों में ग्रहण के वक्त भी होते हैं दर्शन

Chandra Grahan Sutak Kaal: भारत में जब भी सूर्य या चंद्र ग्रहण लगता है, तो आमतौर पर मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। माना जाता है कि ग्रहण और सूतक काल के दौरान भगवान के दर्शन करना अशुभ होता है। इसलिए देशभर के ज्यादातर मंदिरों में इस समय पूजा-पाठ और आरती भी रोक दी जाती है। लेकिन भारत में कुछ ऐसे प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर भी हैं, जहां इस परंपरा का पालन नहीं किया जाता।

ये मंदिर न सिर्फ इस दौरान खुले होते हैं, बल्कि भक्त भगवान के दर्शन और पूजा का लाभ भी ग्रहण काल में लेते हैं। 7 सितंबर को लगने वाले चंद्र ग्रहण में जब अयोध्या, मथुरा और काशी जैसे बड़े मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे, तब भी उज्जैन से लेकर गया और केरल तक कुछ मंदिरों में भगवान के द्वार खुले रहेंगे। आइए जानते हैं ऐसे खास मंदिरों के बारे में...

Chandra Grahan Sutak Kaal

उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर

उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में ग्रहण का असर नहीं पड़ता। यहां मंदिर के द्वार ग्रहण के समय भी खुले रहते हैं और भक्त भगवान महाकाल के दर्शन कर सकते हैं। हालांकि पूजा और आरती के समय में बदलाव किया जाता है, जिसकी जानकारी पहले ही श्रद्धालुओं को दे दी जाती है।
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बीकानेर का लक्ष्मीनाथ मंदिर

राजस्थान के बीकानेर जिले का लक्ष्मीनाथ मंदिर भी ग्रहण में बंद नहीं होता। यहां सूतक काल मान्य नहीं है। मान्यता है कि एक बार ग्रहण के दौरान मंदिर में पूजा नहीं होने से भगवान ने सपने में हलवाई को भूख लगने की बात कही थी। तभी से परंपरा है कि यहां किसी भी ग्रहण पर मंदिर बंद नहीं किए जाते।

केरल का थिरुवरप्पु श्रीकृष्ण मंदिर

केरल के कोट्टायम इलाके में स्थित थिरुवरप्पु श्रीकृष्ण मंदिर की मान्यता और भी अलग है। कहा जाता है कि यहां भगवान कृष्ण भूख सहन नहीं कर पाते। इसी कारण दिन में दस बार भोग लगाया जाता है। एक बार सूर्य ग्रहण में मंदिर बंद होने पर भगवान की कमरपेटी ढीली होकर गिर गई थी। तब से यहां ग्रहण में मंदिर कभी बंद नहीं किया जाता।

गया का विष्णुपाद मंदिर

बिहार के गया में स्थित विष्णुपाद मंदिर भी ग्रहण के दौरान बंद नहीं होता। यहां पिंडदान की विशेष परंपरा है और माना जाता है कि ग्रहण के समय पिंडदान करने से खास पुण्य मिलता है।

काशी विश्वनाथ मंदिर

वाराणसी का काशी विश्वनाथ मंदिर भी बाकी जगहों से अलग है। यहां ग्रहण या सूतक के पूरे समय मंदिर बंद नहीं रहता। ग्रहण से करीब ढाई घंटे पहले ही कपाट बंद किए जाते हैं। चंद्र ग्रहण वाले दिन मंदिर में विशेष आरतियां होती हैं और फिर रात में शयन आरती के बाद कपाट बंद किए जाते हैं।
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