Chaitra Navratri 2023: दुर्गाअष्टमी पर पढ़ें ये चालीसा और आरती , मिलेगा धन-वैभव
Maha Ashtami Chalisa & Aarti in Hindi: मां गौरी के आशीष से इंसान को पद-प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है। मां गौरी के आशीष से इंसान को परेशानियां छू भी नहीं पाती हैं।

Maha Ashtami Chalisa & Aarti in Hindi: नवरात्रि का आठवां दिन मां गौरी का होता है। मां दुर्गा का ये रूप बेहद ही मोहक, सरस और सुंदर है। दुर्गाअष्टमी के दिन गौरी चालीसा और आरती का पाठ करने से इंसान के आर्थिक कष्ट दूर होते हैं।
मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥
॥ चौपाई ॥
- मन मंदिर मेरे आन बसो,
- आरम्भ करूं गुणगान,
- गौरी माँ मातेश्वरी,
- दो चरणों का ध्यान।
- सता गुन की हो दता आप,
- हर इक मन की ग्याता आप,
- काटो हमरे सकल कलेश,
- निरोग रहे परिवार हमेश।
- दुख संताप मिटा देना माँ,
- मेघ दया के बरसा देना माँ,
- जबही आप मौज में आय,
- हठ जय माँ सब विपदाए।
- जीसपे दयाल हो माता आप,
- उसका बढ़ता पुण्य प्रताप,
- फल-फूल मै दुग्ध चढ़ाऊ,
- श्रद्धा भाव से आपको ध्यायु।
- अवगुन मेरे ढक देना माँ,
- ममता आंचल कर देना मां,
- कठिन नहीं कुछ आपको माता,
- जग ठुकराया दया को पाता।
- बिन पाऊ न गुन माँ तेरे,
- नाम धाम स्वरूप बहू तेरे,
- जितने आपके पावन धाम,
- सब धामो को मां प्राणम।
- आपकी दया का है ना पार,
- तभी को पूजे कुल संसार,
- निर्मल मन जो शरण मे आता,
- मुक्ति की वो युक्ति पाता।
- संतोष धन्न से दामन भर दो,
- असम्भव को माँ सम्भव कर दो,
- आपकी दया के भारे,
- सुखी बसे मेरा परिवार।
- अपकी महिमा अती निराली,
- भक्तो के दुःख हरने वाली,
- मनो कामना पुरन करती,
- मन की दुविधा पल मे हरती।
- चालीसा जो भी पढे-सुनाया,
- सुयोग वर् वरदान मे पाए,
- आशा पूर्ण कर देना माँ,
- सुमंगल साखी वर देना माँ।
- गौरी माँ विनती करूँ,
- आना आपके द्वार,
- ऐसी माँ कृपा किजिये,
- हो जाए उद्धहार।
- हीं हीं हीं शरण मे,
- दो चरणों का ध्यान,
- ऐसी माँ कृपा कीजिये,
- पाऊँ मान सम्मान।
गौरी मां की आरती
- जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
- तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
- ओम जय अंबे गौरी,मांग सिन्दूर विराजत,टीको मृगमद को।
- उज्जवल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको॥
- ओम जय अंबे गौरी
- कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै। रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै॥
- ओम जय अंबे गौरी
- केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी। सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी॥
- ओम जय अंबे गौरी
- कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती। कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योति॥
- ओम जय अंबे गौरी
- शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती। धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती॥
- ओम जय अंबे गौरी
- चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे। मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥
- ओम जय अंबे गौरी
- ब्रहमाणी रुद्राणी तुम कमला रानी। आगम-निगम-बखानी, तुम शिव पटरानी॥
- ओम जय अंबे गौरी
- चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरूं। बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरु॥
- ओम जय अंबे गौरी
- तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता। भक्तन की दु:ख हरता, सुख सम्पत्ति करता॥
- ओम जय अंबे गौरी
- भुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी। मनवान्छित फल पावत, सेवत नर-नारी॥
- ओम जय अंबे गौरी।
- कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती। श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥
- ओम जय अंबे गौरी
- श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै। कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै॥
- ओम जय अंबे गौरी, ओम जय अंबे गौरी












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